

pune Historic Stone Bridge: भोर-शिरवल मार्ग पर रामबाग नाले के ऊपर अंग्रेजों के दौर में बनाया गया करीब 141 वर्ष पुराना पत्थरों का ऐतिहासिक पुल अब अतीत का हिस्सा बनने जा रहा है।
पंढरपुर-महाड राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण और शिंदेवाड़ी से भोर-वरंधा घाट मार्ग के चौड़ीकरण की योजना के तहत उत्रौली से भोर के बीच स्थित इस पुराने पुल को हटाने का निर्णय लिया गया है।
सड़क निर्माण और चौड़ीकरण के काम के तहत पुराने पुल को हटाने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और इतिहास प्रेमियों में असंतोष है। उनका कहना है कि सड़क विकास के लिए ऐतिहासिक धरोहर को पूरी तरह खत्म करना जरूरी नहीं है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नए पुल के निर्माण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और पुराने पुल की ऐतिहासिक संरचना को सुरक्षित रखा जाए।
इतिहास प्रेमियों का कहना है कि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखना भी संभव है। उनका सुझाव है कि नए यातायात मार्ग के लिए अलग व्यवस्था करते हुए पुराने पुल को विरासत स्थल के तौर पर सुरक्षित किया जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इस तरह सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य भी पूरा होगा और क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान भी बनी रहेगी।
बताया जाता है कि इस ऐतिहासिक पत्थर के पुल का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल के दौरान किया गया था। पुल के निर्माण की जिम्मेदारी मुंबई शहर के तत्कालीन इंजीनियर विश्वास नाइक से जुड़ी बताई जाती है।
उस समय पुल के निर्माण पर करीब 20 हजार रुपये की लागत आई थी। पत्थरों से बने इस पुल ने लंबे समय तक क्षेत्र में आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम होने की भूमिका निभाई।
141 वर्ष पुराने पुल को हटाए जाने की जानकारी के बाद इतिहास प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने इसके संरक्षण की मांग तेज कर दी है। अब उनकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर इस पुणे शहर ऐतिहासिक पुल को बचाया जा सकता है।