मालेगांव के 3.25 लाख पावरलूम सात दिन बंद, लाखों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का सवाल

Malegaon Powerloom Shutdown: मालेगांव में बढ़ती उत्पादन लागत और यार्न की कीमतों के चलते 3.25 लाख पावरलूम सात दिन बंद रहेंगे। बंदी से लाखों मजदूरों के रोजगार और परिवारों पर संकट गहराया है।
malegaon powerloom shutdown textile industry crisis
मालेगांव पावरलूम बंद(सोर्सः सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Malegaon Textile Industry: मालेगांव शहर का पावरलूम उद्योग एक बार फिर गंभीर संकट से गुजर रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत, यार्न की कीमतों में भारी वृद्धि और राजस्थान के प्रोसेसिंग उद्योग पर लगी पाबंदियों के कारण शहर के करीब 3.25 लाख पावरलूम सात दिनों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। पावरलूम बंद होने से लाखों मजदूरों के सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।

मालेगांव तहसील पावरलूम एसोसिएशन के हाजी यूसुफ इलियास ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद टेक्सटाइल उद्योग पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के साथ यार्न के दाम भी बढ़े हैं। पहले करीब 120 रुपए में मिलने वाला यार्न अब लगभग 170 रुपए तक पहुंच गया है। इसके चलते कपड़े की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जिससे बाजार में मांग प्रभावित हुई है।

malegaon powerloom shutdown textile industry crisis
मालेगांव पावरलूम बंद(सोर्सः सोशल मीडिया)

टेक्सटाइल उद्योग पर संकट गहराया

उन्होंने बताया कि राजस्थान के पाली और बालोतरा क्षेत्र में प्रोसेस यूनिटों पर प्रदूषण संबंधी कार्रवाई के कारण उनके बंद होने से पॉपलिन और कैम्ब्रिज जैसे कपड़ों के उत्पादन पर भी असर पड़ा है। उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से प्रति मीटर करीब डेढ़ से दो रुपए तक का नुकसान हो रहा है। इसके चलते कई कारोबार पहले ही बंद हो चुके हैं।

हाजी यूसुफ इलियास ने कहा कि फिलहाल सात दिनों का बंद रखा गया है और सरकार से मांग की गई है कि पावरलूम उद्योग की समस्याओं को गंभीरता और सहानुभूति के साथ देखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पावरलूम मजदूरों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है और इसका असर कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

malegaon powerloom shutdown textile industry crisis
गड़चिरोली की आदिवासी महिलाएं चला रहीं 100 टन के डंपर, सुरजागढ़ में लॉयड्स मेटल ने बदली रोजगार की तस्वीर

सरकार को पावरलूम उद्योग के लिए नीति बदलनी चाहिए

पावरलूम उद्योग विशेषज्ञ एडवोकेट मोमिन मुजीब ने कहा कि वैश्विक स्तर पर खराब आर्थिक परिस्थितियों के साथ राजस्थान में प्रदूषण के मुद्दे के कारण प्रोसेस यूनिट बंद हैं। इसका सीधा असर मालेगांव के पावरलूम उद्योग पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि करीब 3 लाख पावरलूम बंद रहने से लगभग 5 लाख मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ेगा और गरीब परिवारों के सामने खाने-पीने की समस्या खड़ी हो सकती है।

उन्होंने बताया कि उद्योग की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार को कई बार ई-मेल भेजे गए हैं और अधिकारियों से मुलाकात भी की गई है। ऑनलाइन बैठकें भी हुईं, लेकिन अभी तक समस्या का ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने सरकार से पावरलूम उद्योग के लिए अपनी नीति में बदलाव करने और कच्चे माल के निर्यात पर रोक लगाने की मांग की।

malegaon powerloom shutdown textile industry crisis
भंडारा मेडिकल कॉलेज में खुले में पड़ा मिला बायोमेडिकल कचरा, मरीजों और कर्मचारियों पर संक्रमण का खतरा

मजदूरों को सात दिन का वेतन देने की मांग

मजदूर संगठन ने मांग की है कि बंद की अवधि के सात दिनों का वेतन मजदूरों को दिया जाए। वहीं, मजदूर संगठन के अल्ताफ भाई ने पावरलूम बंद के दौरान मजदूरों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पावरलूम मालिकों ने सात दिन के बंद का ऐलान किया है, लेकिन मजदूरों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया है।

मजदूरों को दिया जाए वेतन

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मजदूरों के वेतन के संबंध में निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन किया जाएगा। पावरलूम उद्योग में सात दिनों की इस बंदी से मालेगांव की अर्थव्यवस्था और उससे जुड़े लाखों परिवारों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब उद्योग से जुड़े लोगों और मजदूरों की निगाहें सरकार की ओर हैं कि इस संकट के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com