टपकती छतें, दरकी दीवारें… वर्धा में 153 जिप स्कूलों की इमारतें जर्जर, हजारों छात्रों की सुरक्षा खतरे में
Wardha ZP Schools: वर्धा के 153 जिला परिषद स्कूलों की इमारतें जर्जर घोषित हुईं। टपकती छत, दरकी दीवारें और कमजोर स्लैब के बीच छात्र पढ़ने को मजबूर, शासन को प्रस्ताव भेजे जाएंगे।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
जिले के स्कूलों की जर्जर इमारतें (सोर्स: AI)
Wardha ZP Schools Dilapidated Buildings: ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की रीढ़ मानी जाने वाली जिला परिषद स्कूलों की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। जिले की आठों तहसीलों में स्थित 153 जिला परिषद स्कूलों की इमारतों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए खतरनाक घोषित किया गया है।
इन स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थी जर्जर भवनों में अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कई स्कूलों की छतों से बारिश के दौरान लगातार पानी टपकता है, दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और स्लैब भी कमजोर हो चुके हैं। कई स्थानों पर कक्षाओं में बारिश का पानी भर जाता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है और हादसे का खतरा बना रहता है।
शिक्षा विभाग ने इन भवनों की मरम्मत और आवश्यक स्थानों पर नई इमारतों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों की ओर बढ़ते रुझान के कारण जिला परिषद स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या भी लगातार घट रही है, जिससे कई विद्यालय बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
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हो चुकी हैं कई घटनाएं
वर्धा जिले में इससे पहले भी कई स्कूलों में छत का प्लास्टर गिरने, दीवारों के हिस्से टूटने और बारिश के दौरान कक्षाओं में पानी भरने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है, लेकिन इन घटनाओं ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा विभाग के अनुसार, पिछले पांच से छह वर्षों में जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए 183 प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे।
जिन्हें मंजूरी मिलने के बाद संबंधित स्कूलों में निर्माण और मरम्मत का कार्य पूरा किया गया। इसके बावजूद इस वर्ष फिर 153 स्कूल भवनों को असुरक्षित घोषित किया गया है। विभाग का कहना है कि नए प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से इन स्कूलों में भी निर्माण और मरम्मत का कार्य कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके।
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UDISE+ में दर्ज की गई
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विद्यालय की इमारत खतरनाक स्थिति में हो, तो उसकी जानकारी UDISE+ शालेय सूचना प्रणाली में दर्ज करना अनिवार्य होता है। इसी प्रक्रिया के तहत जिले के सभी मुख्याध्यापकों और शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों की भवन स्थिति की जानकारी विभाग को उपलब्ध कराई। इसके आधार पर जर्जर स्कूलों की तहसीलवार सूची तैयार की गई है।
सबसे अधिक समुद्रपुर तहसील में 31, हिंगणघाट में 26, देवली में 22, कारंजा में 19, आष्टी में 16, जबकि आर्वी, सेलू और वर्धा तहसीलों में 13-13 स्कूल भवन खतरनाक पाए गए हैं। कुल मिलाकर जिले के 153 स्कूलों को तत्काल मरम्मत या पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
