NCP का अंदरूनी ड्रामा खत्म! पार्थ पवार ने कराई सुलह; पुणे MLC सीट से सुनील टिंगरे ने वापस लिया नामांकन
Pune MLC Election: पुणे विधान परिषद चुनाव में महायुति का सियासी घमासान थम गया है। पार्थ पवार की मध्यस्थता के बाद NCP नेता सुनील टिंगरे ने अपनी नाराजगी छोड़कर नामांकन वापस लेने का फैसला किया है।
- Written By: आकाश मसने
सुनील टिंगरे, पार्थ पवार व विक्रम काकडे (फाइल फोटा, सोर्स: सोशल मीडिया)
Sunil Tingre Withdraws Nomination: पुणे स्थानीय प्राधिकारी विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र में महायुति और राकां के भीतर चल रहा सियासी ड्रामा आखिरकार समाप्त हो गया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता सुनील टिंगरे की नाराजगी दूर करने में पार्थ पवार सफल रहे, जिसके बाद टिंगरे ने चुनावी मैदान से पीछे हटने का फैसला कर लिया। इससे विक्रम काकडे की उम्मीदवारी के रास्ते में खड़े आंतरिक विवाद पर भी विराम लग गया है।
NCP ने संजय काकडे को बनाया उम्मीदवार
दरअसल, महायुति ने पुणे विधान परिषद सीट के लिए उद्योगपति और पूर्व सांसद संजय काकडे के बेटे विक्रम काकडे को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, एनसीपी के ही सुनील टिंगरे ने भी नामांकन दाखिल किया था। इसे डमी उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन इससे पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई थीं। दूसरी ओर भाजपा के प्रदीप कंद ने भी बगावती तेवर दिखाते हुए नामांकन दाखिल कर दिया था, जिससे महायुति के सामने असंतोष को नियंत्रित करने की चुनौती खड़ी हो गई थी।
पार्थ पवार ने सुलझाई NCP की अंदरूनी कलह
इसी बीच पुणे स्थित ‘जिजाई’ निवास पर पार्थ पवार, विक्रम काकडे और सुनील टिंगरे के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक के बाद टिंगरे की नाराजगी दूर हो गई। उन्हाेंने नामांकन वापस लेने की बात कही और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के फैसले को स्वीकार कर लिया।
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पार्टी मुझे कभी भी अकेला नहीं छोड़ेगी : टिंगरे
बैठक के बाद सुनील टिंगरे ने कहा कि पार्टी ने जो निर्णय लिया है, उसे सभी ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुझे कभी भी अकेला नहीं छोड़ेगी। राजनीति में कई बार ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं। संजय काकडे ने पार्टी में प्रवेश किया है, इसलिए उन्हें पार्टी कार्यालय आने का पूरा अधिकार है। मुझे किसी का कोई फोन नहीं आया। मैं अजित दादा का कार्यकर्ता हूं और उनका शब्द निभाता हूं। पार्टी ने मुझे आश्वासन दिया है कि भविष्य में मेरा सम्मान और उचित स्थान बनाए रखा जाएगा।
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एनसीपी नेता सुनील टिंगरे ने यह भी स्पष्ट किया कि वे पार्टी के फैसले के साथ पूरी तरह खड़े हैं और संगठन में किसी तरह का मतभेद नहीं है। उनके इस बयान के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के भीतर चल रही नाराजगी की अटकलों पर भी विराम लग गया है।
