Ajit Pawar Jayanti: सुबह 6 बजे की मीटिंग और 5:55 पर एंट्री! अजित दादा के इस आयरन रूल्स से कांपते थे अफसर
Ajit Pawar Birth Anniversary: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की जयंती पर जानिए उनकी सख्त दिनचर्या, प्रशासनिक अनुशासन और बेबाक फैसलों के किस्से, जिन्होंने उन्हें का सबसे अलग नेता बनाया।
- Written By: आकाश मसने
अजित पवार की जयंती आज (डिजाइन फोटो)
Ajit Pawar Legacy And Discipline Rules: “अजित दादा से मिलना है? तो सुबह 6 बजे का अलार्म नहीं, 5:30 बजे आपकी मौजूदगी का सबूत चाहिए!” यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों तक लागू रहा वो आयरन रूल था, जिसे दादा यानी अजित पवार ने खुद गढ़ा था। 22 जुलाई को अजित दादा की जयंती है। वही दादा, जिन्होंने हमेशा समय की पाबंदी, बेबाक फैसलों और कठोर प्रशासनिक नियंत्रण से महाराष्ट्र की सियासत में अपनी एक अलग और अमिट छाप छोड़ी।
दादा आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वे अपने पीछे अनुशासन का वो कड़क ‘मराठा साम्राज्य’ छोड़ गए हैं, जहां काम में ढिलाई और जीवन में व्यसन दोनों ही दादा की सख्त रेड-लिस्ट में शामिल थे।
महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे कड़क, समय के पाबंद और कुशल प्रशासक माने जाने वाले पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष दिवंगत अजित पवार की आज यानी 22 जुलाई को जयंती है। उनकी जयंती पर आइए जानते हैं उनसे जुड़ी वो बातें, जो उन्हें बाकी नेताओं से बिल्कुल अलग और एक अनुशासनप्रिय जननेता बनाती थीं।
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अजित पवार का परिवार
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिला स्थित देवलाली प्रवरा में हुआ था। उनके माता-पिता अनंतराव और आशाताई पवार थे। उन्होंने वरिष्ठ एनसीपी नेता पद्मसिंह बाजीराव पाटिल की बहन सुनेत्रा पवार से शादी की। उनके दो बेटे पार्थ और जय पवार हैं।
अजित पवार अपनी माता, पत्नी सुनेत्रा पवार, बेटे जय और पार्थ पवार के साथ (सोर्स: सोशल मीडिया)
अजित पवार का राजनीतिक करियर
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में अपने चाचा शरद पवार के पदचिह्नों पर चलते हुए अजित पवार ने 1982 में राजनीति में अपना पहला कदम रखा। वे एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने गए। 1991 में वे पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए और अगले 16 वर्षों तक इस पद पर बने रहे।
अजित पवार 6 बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे सहित विभिन्न सरकारों के अधीन यह पद संभाला। उन्होंने 2022 से 2023 तक महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी कार्य किया और 1991 में बारामती लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
जब 6:02 पर पहुंचने वाले अफसरों की लगती थी क्लास
भारतीय राजनीति में नेताओं का बैठकों में देर से आना एक आम बात मानी जाती है, लेकिन अजित पवार इस ट्रेंड के सबसे बड़े विरोधी थे। मुंबई का मंत्रालय हो या पुणे का सर्किट हाउस, दादा के आम जनता और अधिकारियों से मिलने का पहला टाइम-स्लॉट सुबह ठीक 6:00 बजे का होता था।
अनुशासन का आलम यह था कि अगर मीटिंग सुबह 6:00 बजे की तय होती थी, तो दादा 5:55 बजे अपनी गाड़ी से बाहर कदम रख चुके होते थे। यदि कोई बड़ा अधिकारी या कार्यकर्ता 6:02 बजे भी पहुंचता, तो उस दिन दादा के गुस्से का सामना करना तय था। उनके इस समय की पाबंदी के कारण पूरा प्रशासनिक अमला हमेशा अलर्ट मोड पर रहता था।
सुबह 6 बजे कंस्ट्रक्शन साइट्स पर अजित पवार की सरप्राइज विजिट
बारामती नगर परिषद के नगराध्यक्ष सचिन सातव दादा के अनुशासन का एक किस्सा साझा करते हुए बताते हैं कि जब भी अजित दादा बारामती दौरे पर होते थे, तो सुबह-सुबह ही विकास कार्यों का जायजा लेने निकल पड़ते थे। अक्सर वे सुबह 6 बजे अचानक किसी कंस्ट्रक्शन साइट पर हेलमेट पहने मुआयना करते मिल जाते थे। ठेकेदारों और इंजीनियरों की नींद दादा की इस ‘मॉर्निंग वॉक’ के डर से ही उड़ जाती थी। काम में जरा सी भी लापरवाही या घटिया सामग्री का इस्तेमाल दादा को कतई बर्दाश्त नहीं था।
विकास कामों का जायजा लेते अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
नशे और व्यसन से सख्त नफरत करत थे अजित पवार
प्रशासनिक अनुशासन के साथ-साथ, अजित पवार अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में भी कड़े मूल्यों का पालन करते थे। उन्हें तंबाकू, गुटखा और शराब जैसे नशे और व्यसन से सख्त नफरत थी। वह अक्सर युवाओं और कार्यकर्ताओं को इन व्यसनों से दूर रहने की सलाह देते थे। साथ ही तंबाकू, गुटखा, पान इत्यादि खानेवालों को वह सार्वजनिक रूप से भी लताड़ने से नहीं चूकते थे।
दादाचा वादा’ यानी काम की 100% गारंटी!
महाराष्ट्र के प्रशासनिक गलियारों में एक कहावत मशहूर थी, “नागरिक का काम होगा या नहीं, ये दादा 10 सेकंड में बता देते हैं।” अगर काम नियमों के मुताबिक है, तो दादा बिना वक्त गंवाए फाइल पर तुरंत दस्तखत करते थे। अगर काम गलत है, तो मुंह पर ना बोल देते थे। उनके शब्दकोश में ‘देखते हैं’, ‘करवा देंगे’ या ‘फाइल भिजवा दो’ जैसे हवा-हवाई जुमले शामिल नहीं थे। इसी साफगोई और भरोसे के कारण महाराष्ट्र की जनता उनके फैसलों पर आंख बंद करके विश्वास करती थी।
चुनाव प्रचार के दौरान अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
विरोधी भी थे प्रशासनिक पकड़ के मुरीद
अजित पवार के काम करने की शैली की तारीफ सिर्फ उनकी पार्टी के लोग ही नहीं, बल्कि विपक्षी नेता भी करते थे। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी एक इंटरव्यू के दौरान कहती है कि अजित पवार सुबह 7 बजे से ही मंत्रालय पहुंच जाते थे। उनका सिर्फ एक ही प्यार था महाराष्ट्र की जनता के लिए काम करना। उनकी प्रशासनिक और वित्तीय मामलों की पकड़ बहुत मजबूत थी।
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प्रियंका चतुर्वेदी करती है कि अजित पवार ऐसे व्यक्ति थे जो कम बोलते थे, पर उनका काम बोलता था। जो काम हो सकता था उसे तुरंत हां कर देते थे, और जो नहीं हो सकता, उस पर बिना झिझक ना कह देते थे। ये काम नहीं हो सकता। उनकी यह सबसे बड़ी खासियत थी।
