

Vikram Kakade NCP Candidate Pune: महाराष्ट्र में स्थानीय स्वशासन निकायों के जरिए होने वाले विधान परिषद चुनावों के लिए सोमवार, 1 जून को नामांकन का आखिरी दिन राजनीतिक ड्रामे से भरपूर रहा। पुणे की प्रतिष्ठित सीट महायुति के सीट शेयरिंग फॉर्मूले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खाते में आई थी। इस सीट पर उम्मीदवारी जताने के लिए पिछले कई दिनों से NCP के भीतर भारी रस्साकशी चल रही थी। पार्टी के चार पूर्व विधायकों, दिलीप मोहिते, सुनील टिंगरे, रमेश थोरात और विलास लांडे ने इस सीट के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की थी। इनके अलावा अजीत गवाने, रणजीत शिवतारे और शहर अध्यक्ष दीपक मानकर के नाम भी रेस में आगे चल रहे थे, लेकिन अंतिम क्षणों में घोषित हुए नाम ने सबको चौंका दिया।
पार्टी ने जैसे ही विक्रम काकडे के नाम पर मुहर लगाई, वैसे ही सालों से संगठन को सींचने वाले जमीनी नेताओं का सब्र का बांध टूट गया। पार्वती विधानसभा क्षेत्र के कार्यकारी अध्यक्ष रामदास गाडे ने बिना देर किए अपना त्यागपत्र पार्टी की महिला प्रदेश अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और पुणे शहर अध्यक्ष सुनील टिंगरे को सौंप दिया। गाडे ने अपने इस्तीफे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर बेहद तीखे और गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
रामदास गाडे ने अपने त्यागपत्र में बेहद भावुक और आक्रामक रुख अपनाते हुए लिखा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं ने अपने परिवारों तक को दांव पर लगा दिया। कार्यकर्ता पिछले तीस वर्षों से राकांपा के प्रति पूरी तरह वफादार रहे, लेकिन आज वे कर्ज में डूबे हुए हैं और उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। गाडे ने सीधे तौर पर विक्रम काकडे के पिता और पूर्व सांसद संजय काकडे पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने अतीत में पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया, आज उनके परिवार को पुरस्कृत किया जा रहा है।
इस्तीफे में सीधे आरोप लगाया गया है कि साल 2017 में राकांपा को तोड़ने और पार्टी के दो कार्यकाल के पार्षदों को आर्थिक लालच देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल करवाने के पीछे संजय काकडे का ही हाथ था। रामदास गाडे ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने अजीत दादा की पीठ में छुरा घोंपा और देवेंद्र फडणवीस की गोद में जाकर बैठ गया, आज पार्टी उसी के बेटे विक्रम काकडे को उच्च सदन का टिकट दे रही है। ऐसे में हम जैसे निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ताओं का पार्टी के भीतर क्या महत्व रह जाता है?
विधान परिषद चुनावों के नामांकन के ठीक मौके पर हुए इस इस्तीफे और बढ़ते अंदरूनी असंतोष ने NCP नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पुणे स्थानीय स्वशासन निकाय के चुनाव में पार्टी के पार्षदों और स्थानीय प्रतिनिधियों का वोट निर्णायक होता है। ऐसे में अगर पार्टी के भीतर ही वफादार कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों ने विक्रम काकडे की उम्मीदवारी के खिलाफ अंदरूनी मोर्चा खोल दिया, तो महायुति के लिए इस सीट को निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विपक्ष भी राकांपा की इस अंदरूनी कलह पर पैनी नजर बनाए हुए है।