पवार परिवार के करीबी किरण गुजर व शरद पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ajit Pawar Last Wish: महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को एक ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिला है। शनिवार को सुनेत्रा पवार द्वारा महाराष्ट्र की 11वीं उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से पवार परिवार के भीतर चल रही खींचतान और अटकलों पर अब विराम लगता नजर आ रहा है। पवार परिवार के बेहद करीबी और विद्या प्रतिष्ठान के ट्रस्टी किरण गुजर ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया है कि एनसीपी (NCP) के दोनों गुट अब एक होने जा रहे हैं।
किरण गुजर, जिन्हें स्वर्गीय अजित पवार का करीबी सहयोगी माना जाता है, ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पूरा पवार परिवार अब ‘अजित दादा’ की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए एकजुट होकर काम करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनसीपी के दोनों गुटों का विलय (Merger) करने का सकारात्मक निर्णय लिया जा चुका है, क्योंकि यह अजित पवार की आखिरी ख्वाहिश थी कि परिवार और पार्टी फिर से एक हो जाए। गुजर ने कहा, “अजित दादा के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए हर कोई एकजुट है।”
इस बड़े फैसले की नींव शनिवार को शरद पवार के आवास ‘गोविंदबाग’ में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में रखी गई थी। इस बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार, सांसद सुप्रिया सुले, विधायक रोहित पवार, पार्थ पवार, युगेन्द्र पवार, राजेंद्र पवार और रंजीत पवार शामिल थे। हालांकि, शुरुआत में पार्थ, युगेन्द्र और रोहित पवार ने मीडिया से बात नहीं की थी, जिससे सस्पेंस बढ़ गया था, लेकिन रविवार को गुजर ने स्थिति स्पष्ट कर दी।
किरण गुजर ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह को लेकर परिवार के भीतर जो ‘कम्युनिकेशन गैप’ या गलतफहमियां पैदा हुई थीं, उन्हें अब बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया है। गौरतलब है कि शनिवार को शरद पवार ने कहा था कि उन्हें सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण समारोह की जानकारी नहीं थी। इसके बाद पार्थ पवार ने गोविंदबाग जाकर शरद पवार से मुलाकात की थी और ‘सहयोग’ निवास पर नागरिकों से भी संवाद किया था।
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इस एकीकरण प्रक्रिया के तहत न केवल पार्टी का विलय होगा, बल्कि विद्या प्रतिष्ठान में स्वर्गीय अजित पवार का एक भव्य स्मारक बनाने पर भी चर्चा की गई है। किरण गुजर के अनुसार, विलय की प्रक्रिया एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसमें कुछ समय लगेगा, लेकिन पार्टी नेतृत्व जल्द ही इसका आधिकारिक ऐलान करेगा। यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है, विशेषकर आगामी चुनावों के मद्देनजर।