पुणे जैन बोर्डिंग का मामला गरमाया, जमीन निजी बिल्डर को बेचने के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा
Pune Jain Boarding: नांदगांव में सकल जैन समाज ने पुणे जैन बोर्डिंग की जमीन निजी बिल्डर को बेचने के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। विभिन्न दलों ने आंदोलन को समर्थन दिया, ज्ञापन सौंपा गया।
- Written By: अर्पित शुक्ला
पुणे जैन बोर्डिंग का मामला गरमाया, जमीन निजी बिल्डर को बेचने के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा
Pune News: पुणे स्थित जैन बोर्डिंग को समाज के कब्जे में वापस दिए जाने की मांग को लेकर सोमवार को नांदगांव में सकल जैन समाज एकजुट हुआ और पुलिस स्टेशन तक एक विरोध मोर्चा निकाला. पिछले एक महीने से राज्य में पुणे जैन बोर्डिंग का मामला चर्चा में है. बोर्डिंग के ट्रस्टियों द्वारा बोर्डिंग की 3 एकड़ जमीन कथित तौर पर एक निजी बिल्डर को बेचे जाने की खबर से जैन समुदाय में भारी आक्रोश है.
जैन समुदाय की मांग है कि जैन बोर्डिंग समाज की संपत्ति है, इसलिए यह जमीन और इससे जुड़े अन्य भवन तुरंत समाज को सौंप दिए जाएं. जैन समाज ने कल जैन मंदिर से काली पट्टी बाँधकर विरोध मोर्चा शुरू किया. शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए यह मार्च पुलिस स्टेशन पहुंचा. इस विरोध मोर्चो को शिंदे शिवसेना, उद्धव बालासाहेब ठाकरे शिवसेना (उबाठा), भाजपा, सकल मराठा समाज, आरपीआई (रिपाई) सहित विभिन्न दलों और संगठनों का समर्थन मिला.
उनके पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी आंदोलन में शामिल हुए. पुलिस स्टेशन पर पूर्व नगर अध्यक्ष बबी काका कवडे (शिंदे शिवसेना), दत्तराज छाजेड़ (भाजपा), राजेंद्र देशमुख (शिंदे शिवसेना), संतोष गुप्ता (उद्धव बालासाहेब ठाकरे शिवसेना), और पूर्व नगर अध्यक्ष अरुण पाटिल ने अपने विचार व्यक्त किए और आंदोलन को समर्थन दिया. विधायक सुहास कांदे ने भी आंदोलन को समर्थन दिया. उन्होंने कहा कि वे बाहर होने के कारण मार्च में शामिल नहीं हो सके, लेकिन जैन समाज शांतिप्रिय है और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए वह हमेशा तैयार हैं.
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उन्होंने अपने प्रतिनिधि के माध्यम से आंदोलन को समर्थन दिया. विरोध मोर्चे के दौरान तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें कहा गया कि जैन बोर्डिंग और उससे जुड़ी अन्य सभी संपत्तियां तत्काल समाज के कब्जे में दी जाएं. इस मामले में शामिल सभी ट्रस्टियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए. इस विरोध मार्च में बड़ी संख्या में जैन समुदाय के लोगों, महिलाओं के साथ-साथ अन्य धर्मों के नागरिकों ने भी भागीदारी की.
