पुणे मनपा का बड़ा खेल, नाला सफाई के नाम पर 6 साल में फूंक दिए 164 करोड़, फिर भी पहली ही बारिश में डूबा शहर
Pune Municipal Corporation: पुणे मनपा ने 6 वर्षों में नाला सफाई पर 164 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। राकांपा नेता दत्तात्रय बहिरट द्वारा मांगी गई जानकारी में इस भारी-भरकम खर्च का खुलासा हुआ है।
- Written By: रूपम सिंह
नाला सफाई (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Municipal Corporation Drain Cleaning: पुणे महानगर पालिका (मनपा) द्वारा मानसून पूर्व नाला सफाई के नाम पर पिछले छह वर्षों में 164 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का खुलासा हुआ है। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में हर वर्ष बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह जानकारी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के पूर्व नगरसेवक दत्तात्रय बहिरट द्वारा मांगी गई लिखित सूचना के माध्यम से सामने आई है। मनपा प्रशासन के अनुसार वर्ष 2020 से 2026 के बीच शहर के नालों की सफाई पर 121 करोड़ रुपये तथा बरसाती चैंबरों से गाद निकालने के कार्य पर 43 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस प्रकार कुल 164 करोड़ रुपये मानसून पूर्व तैयारियों पर खर्च किए गए हैं।
हालांकि, इतने बड़े खर्च के बावजूद कर्वेनगर, कोथरुड, सिंहगढ़ रोड, हडपसर सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में हर वर्ष भारी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि थोड़ी देर की तेज बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं और यातायात प्रभावित होता है। कई इलाकों में घरों और दुकानों में भी पानी घुसने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
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बारिश मनपा के दावों की पोल खोल देती है
नियमों के अनुसार मानसून शुरू होने से पहले नाला सफाई और संबंधित सभी कार्य पूरे कर लिए जाने चाहिए, ताकि बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था सुचारु रूप से काम कर सके। लेकिन पुणे में कई बार बारिश शुरू होने के बाद भी सफाई कार्य जारी रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल ही में हुई प्री-मानसून बारिश के दौरान भी कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति देखने को मिली थी, जिससे मनपा के दावों की पोल खुल गई।
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मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार कई ठेकेदारों ने अनुमानित बजट (एस्टीमेट कॉस्ट) से 30 से 50 प्रतिशत कम दर पर निविदाएं हासिल की हैं। ऐसे में इतनी कम लागत पर किए गए कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कम दरों पर काम मिलने से गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इस खुलासे के बाद पुणे शहर में नाला सफाई कार्यों की गुणवत्ता, खर्च की पारदर्शिता और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जलभराव की समस्या आखिर क्यों बनी हुई है।
