पुणे में सड़कों के गड्ढों पर PMC का कागजी दावा, केवल 54 गड्ढे बाकी; बेहाल सड़कों से नागरिकों में भारी आक्रोश
Pune Pothole Controversy: पुणे में सड़कों की बदहाली के बीच मनपा ने दावा किया है कि शहर में सिर्फ 54 गड्ढे बचे हैं। कागजी आंकड़ों के इस दावे को लेकर नागरिकों ने प्रशासन को घेरा।
- Written By: रूपम सिंह
सड़कों के गड्ढों (सोर्स-सोशल मीडिया)
Pune PMC Pothole Audit Report: आंखें बंद कर लेने से रात नहीं हो जाती और कागजों पर कलम चला देने से सड़कों के जानलेवा गड्ढे गायब नहीं हो जाते।’ पुणे में इन दिनों महानगर पालिका के दावे और जमीनी हकीकत के बीच कुछ ऐसा ही विरोधाभास देखने को मिल रहा है। मानसून की हल्की सी फुहार पड़ते ही शहर की सड़कें बेतरतीब गड्डों से छलनी हो चुकी हैं, प्रमुख सड़कों के चारों तरफ बने गड्ढे राहगीरों और वाहनचालकों की कमर तोड़ रहे हैं, लेकिन पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के रोड विभाग का दावा सुनेंगे तो हैरान रह जाएंगे।मनपा का कहना है कि पूरे शहर में अब केवल 54 गड्ढे ही बचे हैं!
क्या कहती है… प्रगति रिपोर्ट
प्रशासन द्वारा जारी 7 जुलाई से 21 जुलाई की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 15 दिनों में शहर के कुल 1,188 गड्डों में से 1,134 गड्डों को पूरी तरह से भर दिया गया है। नागरिकों ने इसे कागजी आंकड़ों की बाजीगरी कहते हुए प्रशासन को घेरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वानवडी क्षेत्र के सभी 194 गड्डों को दुरुस्त कर दिया गया है, जबकि कोंढवा-धनकवडी में 358, हडपसर में 127 और वारजे-कर्वेनगर में भी 104 गड्ढे भरने की बात कही गई है।
कोथरुड- बावधन में 68, औंध-बाणेर में 59, बिबवेवाड़ी में 73, सिंहगढ़ रोड पर 26, येरवडा-वडगांवशेरी में 35 तथा नगर रोड- क्षेत्र में 13 गड्डों की मरम्मत की गई है। प्रशासन ने बड़े गर्व के साथ ऐलान किया है कि आगामी 1 अगस्त तक पूरे पुणे शहर को ‘गड्डामुक्त’ कर दिया जाएगा।
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पीएमसी ने बदली अपनी रणनीति
सड़क मरम्मत में हो रही देरी और जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए अब प्रशासन ने अपनी रणनीति बदली है। पीएमसी ने 12 मीटर तक चौड़ी आंतरिक सड़कों की मरम्मत का अधिकार एक बार फिर क्षेत्रीय कार्यालयों को सौंप दिया है, ताकि स्थानीय स्तर पर काम तेजी से हो सके, जबकि 12 मीटर से अधिक चौड़ी प्रमुख सड़कों की जिम्मेदारी मुख्य रोड विभाग के पास ही रहेगी।
रिपोर्ट पर खड़े हुए कई सवाल
लेकिन, मनपा रिपोर्ट के पीछे की कड़वी हकीकत बेहद दर्दनाक है। शहर की प्रमुख सड़कों पर आज भी बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। इस रिपोर्ट को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश का पानी भर जाने से वाहन चालकों को गड्डों की गहराई का अंदाजा नहीं होता, जिससे दोपहिया सवार रोज दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
नागरिकों का आरोप है कि मनपा अधिकारी सिर्फ आंकड़ों का खेल खेलकर खानापूर्ति कर रहे है। कोल्ड मिक्स डालकर गड्ढों को केवल अस्थायी रूप से ढका जाता है, जो अगली ही बारिश में बह जाता है और गड्ढा फिर अपनी जगह पर उतर आता है।
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ऐसा फैला है सड़कों का जाल
आरएएमएस सर्वेक्षण के अनुसार, पुणे मनपा क्षेत्र में कुल 2,280 किलोमीटर का विशाल सड़क नेटवर्क है, जिसमें 1,115.05 किमी कंक्रीट और 918.44 किमी डामर सड़क के साथ ही 144.41 किमी थिन व्हाइट टॉपिग, 71.69 किमी कच्ची सड़कें, 20.78 किमी पेवर ब्लॉक, 7.45 किमी मैस्टिक तथा 2.42 किमी डब्ल्यूबीएम की सड़कें शामिल है।
इस पूरे तंत्र के बावजूद, हर मानसून में शहरवासियों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। सड़क लंबाई के हिसाब से नगर रोड-वडगांवशेरी (411.03 किमी) और हडपसर-मुंढवा (376.50 किमी) क्षेत्र सबसे आगे हैं। सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि 3 से 6 वर्ष पुरानी सड़कें 943.76 किमी हैं, जबकि 61 वर्ष से अधिक पुरानी सड़कें केवल 0.71 किमी ही बची हैं।
बेतुके दावों पर कोई विश्वास नहीं करने वाला
पुणे स्थानीय नागरिक अमेय सोनावणे ने बाताया की प्रशासन कागजी रिपोर्ट जारी करब तक जमीनी स्तर पर सड़कें सुरक्षित और गड्डामुक्त नहीं हो जाती, तब तक इन 54 गड्ढों वाले बेतुके दावों पर कोई विश्वास नहीं करने वाला।
