महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले टूटेगा एमवीए! गठबंधन को लेकर शरद पवार के बयान ने बढ़ाया सस्पेंस
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र निकाय चुनाव में महा विकास आघाडी (MVA) के साथ लड़ने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से अब तक इस पर चर्चा नहीं हुई है।
- Written By: आकाश मसने
शरद पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। इस साल के अंत में चुनाव होने है। इसके लिए राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी है। विधानसभा चुनाव दो प्रमुख गठबंधनों महायुति और महाविकास अघाड़ी ने चुनाव लड़ा था। लेकिन निकाय चुनाव में दोनों गठबधंनों को लेकर अभी सस्पेंस बरकारार है।
इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को कहा कि महा विकास आघाडी (एमवीए) में शामिल दल महाराष्ट्र में आगामी नगर निगम चुनाव एक साथ लड़ने पर विचार करेंगे। पवार ने बारामती में संवाददाताओं से कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य में नगर निगम चुनाव कराए जाएं, इसलिए प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।
अब तक कांग्रेस ने नहीं की चर्चा
शरद पवार ने बताया कि हमने अब तक कांग्रेस के साथ चर्चा नहीं की है, लेकिन हमारी पार्टी, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी), शेतकरी कामगार पक्ष और अन्य दल एक साथ आएंगे और एक साथ चुनाव लड़ने की संभावना तलाशेंगे। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हम एक साथ चुनाव लड़ना चाहते हैं।
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जब शरद पवार से यह पूछा गया कि क्या एमवीए मुंबई में निकाय चुनाव एक साथ लड़ेगा तो उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है। हमारे सहयोगी दल उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) का मुंबई में मजबूत आधार है, और उनकी राय पर विचार किया जाएगा।
बीएमसी पर शिवसेना का राज
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को कुछ वर्ष पहले प्रशासक के शासन के अधीन कर दिया गया था। इससे पहले दो दशक तक बीएमसी पर बाल ठाकरे द्वारा स्थापित अविभाजित शिवसेना का शासन था। पिछले साल के विधानसभा चुनावों में एमवीए राज्य की 288 सीटों में से केवल 46 सीटें जीत सका था, ऐसे में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में भी काफी प्रतिस्पर्धा होने की उम्मीद है।
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महाराष्ट्र में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य बनाने के सवाल पर पवार ने कहा कि इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे वैकल्पिक ही रहना चाहिए। जो लोग हिंदी चुनना चाहते हैं, वे इसे चुन सकते हैं। सिर्फ इसलिए कि 50 से 60 प्रतिशत आबादी हिंदी बोलती है, इस भाषा को सभी के लिए अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
