Pune में वायु प्रदूषण पर सख्ती, निर्माण स्थलों पर एयर क्वालिटी सेंसर अनिवार्य
Pune Air Pollution: महाराष्ट्र सरकार ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 5,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली सभी निर्माण परियोजनाओं पर सेंसर-आधारित एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम अनिवार्य कर दिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पिंपरी चिंचवड़ वायु प्रदूषण (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: महाराष्ट्र में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने निर्माण क्षेत्र पर सख्त नियंत्रण लागू करने का फैसला लिया है। हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे हानिकारक धूल कणों के बढ़ते स्तर को देखते हुए सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इसके तहत अब शहरों में 5,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली सभी पुरानी और नई निर्माण परियोजनाओं के स्थलों पर सेंसर-आधारित वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकारी आदेश के अनुसार, संबंधित बिल्डर और डेवलपर्स को अपने निर्माण स्थलों पर यह प्रणाली 15 दिनों के भीतर स्थापित कर सक्रिय करनी होगी। तय समयसीमा के भीतर नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित परियोजनाओं के खिलाफ सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बन रही है, जिससे शहरों में हवा की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
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सेंसर-आधारित निगरानी
एआरएआई (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) की वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पीएम 10 प्रदूषण में निर्माण गतिविधियों का योगदान लगभग 23 प्रतिशत है। इसी आंकड़े को आधार बनाते हुए प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि सेंसर-आधारित निगरानी से वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता की जानकारी मिल सकेगी और नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी।
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं
इस संदर्भ में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत आदेश जारी किया है। यह आदेश निजी और सार्वजनिक दोनों प्रकार की आवासीय, वाणिज्यिक तथा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर समान रूप से लागू होगा। बोर्ड के अनुसार, यह व्यवस्था प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को और प्रभावी बनाएगी।
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पुणे महानगरपालिका ने इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पाषाण के सहयोग से सेंसर उपकरणों के तकनीकी मानक तय किए हैं। नगर प्रशासन का कहना है कि तकनीकी मानकों के पालन से निगरानी प्रणाली अधिक विश्वसनीय होगी और शहर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लाने में मदद मिलेगी। सरकार का दावा है कि यह पहल शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
