अमरावती विवि के 42वें दीक्षांत समारोह, डॉ. कमलताई गवई को डी.लिट की उपाधि दी (सोर्स: नवभारत)
Sant Gadge Baba Amravati University News: भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि युवा केवल देश के नागरिक नहीं, बल्कि भारत के परिवर्तन और प्रगति के सशक्त भागीदार हैं। आने वाले समय में नेतृत्व की बागडोर युवाओं के हाथों में होगी और युवा शक्ति ही राष्ट्र की असली पहचान है। वह संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के 42वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि ईमानदारी, निष्ठा और नैतिक साहस व्यक्ति को जीवन में सही निर्णय लेने की शक्ति देते हैं। केवल प्रयास करना पर्याप्त नहीं, बल्कि सकारात्मक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना भी आवश्यक है। उन्होंने अनुशासन, टीम वर्क और सहानुभूति को जीवन की महत्वपूर्ण विशेषताएं बताते हुए विद्यार्थियों से बदलाव को स्वीकार करने और नई सोच को अपनाने का आह्वान किया।
अध्यक्षता उपकुलपति डॉ. मिलिंद बारहाते ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग ‘एआई’ अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता का है और विद्यार्थियों को इससे घबराने के बजाय नई कौशल विकसित कर अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। विश्वविद्यालय ने स्नातक स्तर पर सभी संकायों में एआई को अनिवार्य घटक के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया है। कमल गवई को मिली डी.लिट उपाधि समारोह में 466 शोधार्थियों को आचार्य (पीएच.डी.) उपाधि प्रदान की गई। साथ ही मानव विज्ञान संकाय के अंतर्गत राज्यशास्त्र विषय में डॉ. कमल रामकृष्ण गवई को डी।लिट की सर्वोच्च उपाधि से सम्मानित किया गया।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय से 451 महाविद्यालय संबद्ध है, जिनमें लगभग दो लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस वर्ष 42,317 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए गए, जबकि 466 शोधार्थियों को पीएच. डी. की उपाधि से सम्मानित किया गया। समारोह की शुरुआत संत गाडगे बाबा की प्रतिमा पूजन से हुई। राष्ट्रगीत, महाराष्ट्र गीत और विश्वविद्यालय गीत के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ तथा पसायदान और राष्ट्रगीत के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी, विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, विद्यार्थी और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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मई 2025 में भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेते समय भूषण गवई ने अपनी मां डॉ. कमलताई गवई के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया था। राष्ट्रपति भवन में आयोजित उस समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने तालियां बजाकर इस भावुक क्षण का स्वागत किया था। कमलताई गवई ने भी बेटे को आशीर्वाद देते हुए विनम्रतापूर्वक सिर झुकाकर नमस्कार किया था। अब वही गर्व और सम्मान का क्षण पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने फिर से अनुभव किया। संत गाडगेबाबा अमरावती विद्यापीठ के 42वें दीक्षांत समारोह का अवसर था।
इस समारोह में डॉ. कमलताई गवई को मानविकी संकाय के अंतर्गत राजनीति विज्ञान विषय में ‘वाङ्गय पंडित (डी. लिट.)’ की सर्वोच्च उपाधि से सम्मानित किया गया। यह उपाधि पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे के हाथों प्रदान की गई। दीक्षांत समारोह के समापन के समय भूषण गवई सभागार में पहुंचे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनका स्वागत किया, वे सीधे दर्शक दीर्घा में बैठी अपनी मां कमलताई गवई के पास पहुंचे और उन्हें नमस्कार किया। यह दृश्य उपस्थित लोगों के लिए अत्यंत भावुक क्षण बन गया, इस अवसर पर उनके भाई डॉ. राजेंद्र गवई, बहन कीर्ति गवई तथा अन्य परिजन भी मौजूद थे।
दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों की मेधावी छात्राओं ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। कुल पदकों में लगभग 80 प्रतिशत पदक छात्राओं को प्राप्त हुए, जबकि 20 प्रतिशत पदक छात्रों को मिले। विशेष रूप से नेहरू कला, वाणिज्य व विज्ञान महाविद्यालय, नेर परसोपंत की छात्रा निकिता पुनसे ने छह स्वर्ण और एक नकद पुरस्कार हासिल किया। आर.ए. कला, एम. के। वाणिज्य व एस. आर. राठी विज्ञान महाविद्यालय, वाशिम की पल्लवी राठौड़ ने पांच स्वर्ण और एक रजत पुरस्कार प्राप्त किया। श्री संत गजानन महाराज अभियांत्रिकी महाविद्यालय, शेगांव की तेजस्विनी भगत तथा विद्याभारती महाविद्यालय, अमरावती की साईश्री इंदुरकर ने चार-चार स्वर्ण पदक अर्जित किए।