‘मेरा वोट किसने डाला?’ पुणे के जुन्नर में बोगस वोटिंग देख भड़के युवा, मतदान केंद्रों पर भारी तनाव
ZP Election 2026: जुन्नर तालुका के ZP-पंचायत समिति चुनाव 2026 में बोगस वोटिंग, मतदाता सूची की गड़बड़ी और प्रशासनिक अव्यवस्था से हंगामा मच गया। वहीं बुजुर्गों ने मतदान कर लोकतंत्र की मिसाल पेश की।
- Written By: आकाश मसने
मतदान के लिए अपनी पर्ची खोजते मतदाता (सोर्स: सोशल मीडिया)
Junnar ZP Election Bogus Voting: महाराष्ट्र की राजनीति में अत्यंत प्रतिष्ठित माने जाने वाले जिला परिषद (ZP) और पंचायत समिति चुनाव 2026 के दौरान पुणे जिले के जुन्नर तालुका से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां के अणे-मालशेज बेल्ट में मतदान को लेकर सुबह से ही जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा था, लेकिन दोपहर होते-होते ‘बोगस वोटिंग’ और प्रशासनिक अव्यवस्था की शिकायतों ने चुनाव के रंग में भंग डाल दिया। मतदान केंद्रों पर उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई जब कई युवा मतदाताओं को पता चला कि उनका वोट उनके पहुंचने से पहले ही कोई और डाल चुका है।
बोगस वोटिंग पर युवाओं का फूटा गुस्सा
जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के दौरान जुन्नर के कुछ संवेदनशील मतदान केंद्रों पर लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला वाकिया पेश आया। पहली बार मतदान करने पहुंचे कई उत्साहित युवा जब केंद्र के भीतर गए, तो चुनाव अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनका मतदान पहले ही हो चुका है। यह सुनकर युवाओं का पारा चढ़ गया और केंद्रों के बाहर भारी हंगामा शुरू हो गया। एक आक्रोशित युवती मतदाता ने कहा कि वे लोकतंत्र का उत्सव मनाने आए थे, लेकिन उनके हक का वोट किसी और ने छीन लिया, जो बेहद घातक है। कई गांवों में इस मुद्दे को लेकर दो गुटों के बीच तीखी झड़पें भी हुईं, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रशासनिक लापरवाही और गायब नाम
सिर्फ बोगस वोटिंग ही नहीं, बल्कि मतदाता सूची में भारी त्रुटियों ने भी नागरिकों को परेशान किया। अणे-माळशेज क्षेत्र के कई पुराने और नियमित मतदाताओं के नाम अचानक सूची से गायब मिले। कई बुजुर्ग मतदाता अपना आधार कार्ड और पहचान पत्र लेकर घंटों कतार में खड़े रहे, लेकिन अंत में नाम न होने के कारण उन्हें बिना वोट दिए ही घर लौटना पड़ा। मतदाताओं ने निर्वाचन विभाग के नियोजन पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक ‘सावलागोंधल’ (अव्यवस्था) करार दिया। कई मतदाता एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक भटकते रहे, लेकिन उन्हें अपना नाम नहीं मिला।
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97 साल के दादाजी ने डाला वोट
तनाव और अव्यवस्था के बीच कुछ प्रेरणादायक तस्वीरें भी सामने आईं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में 80 से 90 साल के बुजुर्गों ने लाठी के सहारे मतदान केंद्र पहुंचकर लोकतंत्र के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई। ओतूर के चैतन्य विद्यालय के 97 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक मुरलीधर गहिनाजी भोर गुरुजी ने अपने पोते का हाथ पकड़कर वोट डाला। उन्होंने संदेश दिया कि विकास करने वाले व्यक्ति को चुनने का यही सही दिन है और वे 90 की उम्र पार करने के बाद भी कभी मतदान करना नहीं भूले।
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राजनीतिक समीकरण और गिरता स्तर
चुनाव के दौरान मतदाताओं के मन में वर्तमान राजनीति को लेकर कड़वाहट भी देखी गई। ओतूर के एक वरिष्ठ मतदाता भास्कर शंकर मुंढे ने कहा कि पिछले चार सालों में महाराष्ट्र की राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि यह समझ पाना मुश्किल है कि कौन सत्ता में है और कौन विपक्ष में। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता स्वार्थ के लिए हाथ मिला लेते हैं, जिससे आम मतदाता के वोट की कीमत शून्य हो गई है। इस बीच, जुन्नर में उम्मीदवारों की जीत-हार को लेकर 1,000 से 5,000 रुपये तक की शर्तें (सट्टेबाजी) लगने और अफवाहों का बाजार गर्म होने की खबरें भी चर्चा में रहीं। कुल मिलाकर, जुन्नर तालुका में यह चुनाव मिश्रित अनुभवों वाला रहा, जहां बुजुर्गों के उत्साह पर बोगस वोटिंग और प्रशासनिक विफलता का साया मंडराता रहा।
