Bhandara News: चार हजार शिक्षकों का वेतन लंबित, प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ा
Shalarth ID Investigation: भंडारा जिले में शालार्थ आईडी जांच के कारण लगभग चार हजार शिक्षकों का जनवरी माह का वेतन अटक गया है, जिससे आर्थिक संकट और बैंक किस्तों के भुगतान में परेशानी का सामना करना पड़ा।
- Written By: आंचल लोखंडे
Maharashtra teacher salary issu (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara Teachers Salary Delay: नववर्ष के पहले ही महीने में जिले के लगभग चार से साढ़े चार हजार शिक्षकों का जनवरी माह का वेतन अब तक उनके खातों में जमा नहीं हो सका है। शालार्थ आईडी जांच के नाम पर कर्मचारियों को नागपुर स्थित शिक्षा उपसंचालक कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने से पूरी वेतन प्रणाली चरमरा गई है, जिससे शिक्षकों पर गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।
भंडारा जिले की पंचायत समितियों और वेतन अधीक्षक कार्यालय के कर्मचारियों को शालार्थ आईडी घोटाले की जांच के लिए 10 से 15 दिनों के लिए नागपुर बुलाया गया है। इनमें वेतन तैयार करने वाले लिपिक दिनेश काटेखाये भी शामिल हैं। जिले का कंसोलिडेटेड वेतन प्रतिवेदन (सभी खातों का एकत्रित वेतन विवरण) तैयार करने की संपूर्ण जानकारी केवल उन्हीं के पास होने के कारण मिडिल स्कूल, हाईस्कूल और कनिष्ठ महाविद्यालयों के शिक्षकों का वेतन अटक गया है।
कर्मचारियों के बीच समन्वय की भारी कमी
वेतन भुगतान के लिए आवश्यक ओटीपी संबंधित कर्मचारियों के मोबाइल पर प्राप्त होता है, लेकिन वे नागपुर में प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण ओटीपी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे पूरी प्रक्रिया ठप हो गई है। इस घटनाक्रम से वेतन अधीक्षक कार्यालय और कर्मचारियों के बीच समन्वय की भारी कमी उजागर हुई है। इस संबंध में जब वेतन अधीक्षिका दुपारे से दूरभाष पर संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
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प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी किए गए आदेश
जानकारी के अनुसार, शालार्थ आईडी घोटाले की जांच अंतिम चरण में है। राज्य के विभिन्न जिलों के कुछ विभागीय कर्मचारियों को नागपुर स्थित शिक्षा उपसंचालक कार्यालय में उपस्थित रहने के आदेश दिए गए हैं। हालांकि, जिला परिषद के कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजते समय मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अनुमति और सहमति आवश्यक होती है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे आदेश जारी किए जाने की बात सामने आई है।
वेतन न मिलने के कारण कई शिक्षकों द्वारा लिए गए बैंक ऋण की किस्तें समय पर जमा नहीं हो सकीं, जिससे उन पर दंडात्मक ब्याज लगने की संभावना है। इसका सीधा आर्थिक भार शिक्षकों को उठाना पड़ रहा है, जिससे उनमें गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
