पंढरपुर की वारी में उठी जनमन की पुकार, सपकाल ने विठु माउली से की प्रार्थना
सपकाल ने पुणे-सोलापुर मार्ग स्थित यवत गांव से पैदल यात्रा की शुरुआत की और वरवंड गांव तक ‘दिंडी’ (समूह यात्रा) में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं से संवाद भी किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
हर्षवर्धन सपकाल ने विठु माउली से की प्रार्थना (सौजन्यः सोशल मीडिया)
पुणे: महाराष्ट्र में जारी पंढरपुर वारी की श्रद्धापूर्ण पदयात्रा के बीच, सामाजिक न्याय और जनहित से जुड़े मुद्दों की गूंज भी सुनाई दी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मंगलवार को इस आध्यात्मिक यात्रा में शामिल होकर किसानों की दुर्दशा, महिलाओं की असुरक्षा और युवाओं की बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर आवाज़ उठाई। पैदल यात्रा के दौरान उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा “हम कामना करते हैं कि किसानों को अच्छे दिन प्राप्त हों, युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिले और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार समाप्त हों।”
हर्षवर्धन सपकाल ने किसानों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, बार-बार होने वाली प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों की फसलें बर्बाद कर दी हैं। बाजार में उपज का सही मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ गया है। लगातार बढ़ते कर्ज और आत्महत्या की घटनाएं साबित करती हैं कि आज किसान को सबसे अधिक उपेक्षित किया गया है। उन्होंने कहा, “एक मेहनतकश किसान दिन-रात खेत में श्रम करता है, लेकिन उसे उसका हक नहीं मिलता। यह केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय भी है।”
संतों की परंपरा और वारी का संदेश
सपकाल ने पुणे-सोलापुर मार्ग स्थित यवत गांव से पैदल यात्रा की शुरुआत की और वरवंड गांव तक ‘दिंडी’ (समूह यात्रा) में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं से संवाद भी किया। उन्होंने कहा “वारी केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, यह समाज में समानता, भाईचारे और सेवा की भावना को जीवंत करती है।
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संतों ने हमेशा सामाजिक एकता और न्याय का संदेश दिया है, और आज वही मूल्य फिर से जीवित करने की आवश्यकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण तक संतों के विचारों का गहरा प्रभाव रहा है, और आज जब समाज में विभाजन और असमानता बढ़ रही है, तब इन मूल्यों की ओर लौटना अनिवार्य हो गया है।
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महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं की चिंता
हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य में बढ़ते महिला अपराधों और बेरोजगारी पर भी गहरी चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा “आज हर वर्ग की महिला असुरक्षित महसूस कर रही है – घर में, सड़क पर, और कार्यस्थलों पर। यह समाज के लिए एक शर्मनाक स्थिति है।” “देश और राज्य में लाखों पढ़े-लिखे युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन सरकार की नीति में ठोस समाधान नहीं दिखाई देता।”
आषाढी एकादशी निमित्त यवत ते वरखंड दिंडी सोहळ्यात सहभागी होत वारकऱ्यांसोबत चालण्याचा योग आला. वारकऱ्यांच्या भक्तिभावाचा आणि उत्साहाचा अनुभव घेऊन विठ्ठलाच्या भक्तीत लीन झालो.
या पवित्र प्रवासात चालत असलेल्या थकलेल्या वारकऱ्यांना थोडा विराम घेता यावा, म्हणून सेवाभावाने पाणी वाटप… pic.twitter.com/Bc5K89TunX — Harshwardhan Sapkal (@INCHarshsapkal) June 24, 2025
कांग्रेस की सामाजिक भागीदारी
सपकाल ने कहा, कांग्रेस ने इस बार पंढरपुर वारी में केवल धार्मिक आस्था के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से भाग लिया है। हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों को उजागर करने का माध्यम भी है। “हम वारी के माध्यम से यही संदेश देना चाहते हैं कि जब तक समाज में न्याय नहीं होगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा। किसानों, महिलाओं और युवाओं की आवाज़ उठाना ही आज की सबसे बड़ी सेवा है।”
हर्षवर्धन सपकाल द्वारा पंढरपुर वारी में उठाई गई यह प्रार्थना सिर्फ आस्था की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज के सबसे ज़रूरी मुद्दों की ओर सरकार और जनता का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है। किसानों का संकट, महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं का भविष्य ये मुद्दे अब केवल भाषण नहीं, बल्कि नीतिगत प्राथमिकता बनें यही इस यात्रा का असल उद्देश्य रहा।
