Truck Helper Forced To Eat Cow Dung Pune (फोटो क्रेडिट-X)
Truck Helper Forced To Eat Cow Dung Pune: पुणे के पास खेड शिवापुर इलाके से एक बेहद विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहां कथित गौरक्षकों के एक समूह ने एक 18 वर्षीय ट्रक हेल्पर के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उसे जबरन गोबर खाने पर भी मजबूर किया। यह घटना तब हुई जब पीड़ित युवक कराड से मुंबई की ओर जा रहे एक ट्रक में भैंसों को ले जा रहा था। रास्ते में कुछ लोगों ने ट्रक को रोका और उन पर अवैध पशु परिवहन का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस पूरी घटना का विवरण सामने आने के बाद इलाके में तनाव व्याप्त है और लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पीड़ित युवक के अनुसार, उनके पास पशु परिवहन से संबंधित सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज मौजूद थे, लेकिन हमलावरों ने उनकी एक नहीं सुनी। समूह ने न केवल युवक के साथ मारपीट की और उसे गंदी गालियां दीं, बल्कि अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए उसे सड़क किनारे पड़ा गोबर खाने के लिए मजबूर किया। इस दर्दनाक अनुभव के बाद पीड़ित ने पुणे के अंबेगांव पुलिस स्टेशन पहुंचकर आपबीती सुनाई और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में फिलहाल एक गैर-संज्ञेय (NC) रिपोर्ट दर्ज की है और आगे की तकनीकी जांच जारी है।
In Maharashtra Pune a Muslim youth was
brutally beaten and forced to eat cow dung by extremists, led by a transgender woman
named Bipasha Manikam @MWLOrg_en @zoo_bear pic.twitter.com/wMekDO0DsZ — ka32news (@abrar_7kk) March 9, 2026
इस घटना का सबसे भयावह पहलू वह अमानवीय व्यवहार है जो महज 18 साल के युवक के साथ किया गया। पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि हमलावरों ने उसे घेर लिया और जब उसने वैध कागजात दिखाने की कोशिश की, तो उन्होंने उसे थप्पड़ मारे और अपमानित किया। इसके बाद उसे पकड़कर जबरन गोबर उसके मुंह में डाला गया। इस कृत्य के दौरान वहां मौजूद अन्य लोग मूकदर्शक बने रहे या वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। यह घटना दर्शाती है कि कैसे कानून को अपने हाथ में लेने वाले तत्व मानवीय गरिमा को ताक पर रखकर दहशत फैला रहे हैं।
पीड़ित युवक और ट्रक चालक का दावा है कि वे पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे थे और भैंसों का परिवहन पूरी तरह वैध था। आमतौर पर ऐसी घटनाओं में गौरक्षक गायों के परिवहन पर आपत्ति जताते हैं, लेकिन यहां भैंसों के परिवहन को भी निशाना बनाया गया। बिना दस्तावेजों की जांच किए या पुलिस को सूचित किए बिना ट्रक को बीच सड़क पर रोकना और हेल्पर को प्रताड़ित करना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि हमलावर समूह कौन था और क्या वे किसी विशेष संगठन से जुड़े हुए हैं।
अंबेगांव पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है, लेकिन केवल गैर-संज्ञेय मामला दर्ज होने पर स्थानीय लोगों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है। मांग की जा रही है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए इसे गंभीर धाराओं में तब्दील किया जाए। पुलिस घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। यह घटना पुणे जैसे प्रगतिशील शहर के पास हुई है, जिससे कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पीड़ित युवक गहरे सदमे में है और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगा रहा है।