Pune में सरकारी दफ्तरों पर 342 करोड़ का पानी बिल बकाया, RTI से खुलासा
Pune News: पुणे महानगरपालिका से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि PMC के अलग-अलग केंद्रीय और राज्य सरकार के ऑफिसों पर 324 करोड़ रुपये का Water Supply Bill बाकी है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे न्यूज (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: पुणे मनपा (पीएमसी) क्षेत्र के विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सरकार के कार्यालयों पर 342 करोड़ रुपए का पानी सप्लाई बिल बकाया है। मामला सजग नागरिक मंच द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से सामने आया है।
मंच ने पीएमसी आयुक्त नवल किशोर राम से इस बकाया को वसूलने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। नागरिक मंच के अध्यक्ष विवेक वेलणकर ने बताया कि बकाया राशि में कुछ बड़े नाम हैं, जैसे कैंटोनमेंट बोर्ड पर 40 करोड़ रुपए, गारिसन इंजीनियर्स पर 50 करोड़ रुपए, रेलवे विभाग पर 45 करोड़ रुपए, ससून अस्पताल पर 8 करोड़ रुपए और येरवडा जेल पर 7 करोड़ रुपए का पानी का बिल बकाया है।
इसके अतिरिक्त डाक विभाग, BSNL, राज्य के जल संसाधन विभाग, पुलिस एवं शिक्षा विभाग सहित कई अन्य कार्यालयों पर भी लाखों रुपए का बकाया हैं। वेलणकर ने पीएमसी से आग्रह किया है कि यदि आवश्यक हो तो संबंधित जल उपयोगकर्ताओं पर जलापूर्ति रोकने जैसी सख्त कार्रवाई की जाए।
सम्बंधित ख़बरें
महाराष्ट्र में आसमान से बरस रही आग; लू की चपेट में आने से 6 की मौत, विदर्भ में 350 से ज्यादा बीमार
मुंबई पर मंडराया जल संकट: 15 मई से पूरे महानगर में 10% पानी की कटौती लागू
पुणे की दिग्गज कंपनी Adinath Agro अब बनी Adinova; सुरभि और विन सॉस के साथ नई पहचान से बाजार में मचाएगी धूम
अगर बॉडी बनाने के लिए फाइबर को छोड़ प्रोटीन पर दें रहें ध्यान, तो हो जाइए सावधान! हो सकता है कैंसर का खतरा
ये भी पढ़ें :- Mumbai News: JNPT पर बड़ा खुलासा: दुबई के रास्ते भारत लाया जा रहा था पाकिस्तानी माल
मनपा से कार्रवाई की मांग, सभी के लिए नियम हो समान
वेलणकर का मानना है कि आम नागरिकों और सरकारी प्रतिष्ठानों के लिए नियम समान होने चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने एक उदाहरण – पेश किया कि पूर्व आयुक्त महेश झगडे ने कुछ वर्षों पहले कैन्टोन्मेंट बोर्ड की जल आपूर्ति काट दी थी, जिससे बकाया राशि का भुगतान तुरंत हो गया था। पीएमसी जल आपूर्ति विभाग के प्रमुख नंदकिशोर जगताप ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वसूली में कई तरह की चुनौतियां हैं। कुछ विभागों में स्थापित किए गए वाटर मीटर खराब हैं। विभाग मीटर बदलने एवं उनकी लागत को बिलों में समाहित करने की तैयारी में है। लेकिन अन्य पक्षों ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया है। जगताप ने कहा कि इस विषय पर वरिष्ठ स्तर की बैठक बुलाई जाएगी ताकि समस्या का समाधान हो सके।
