प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Gadchiroli Liquor Smuggling News: आदिवासी बहूल जिले में उद्योग की नींव रखकर जिले की अल्प अवधि में भी स्टील हब के रूप में पहचान बनाई है। वहीं चंद्रपुर की तर्ज पर गड़चिरोली जिले की शराबबंदी संदर्भ में विचार करने संदर्भ में डा। सालवे ने तत्कालीन शराब उत्पादन शुल्क मंत्री तथा उपमुख्यमंत्री दिगवंत अजीत पवार से भेंट लेकर ज्ञापन सौंपा था। जहां अजीत पवार ने कहा कि शराबबंदी के नाम पर लोगों को गुमराह नहीं किया जा सकता है।
इस संदर्भमें जल्द ही निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। जिससे इस संदर्भ में शराबबंदी की समीक्षा समिति गठित होने की उम्मीद थी। लेकिन विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मृत्यु हो गई। लेकिन अब नए शराब उत्पादन शुल्कमंत्री के रूप में सुनेत्रा पवार ने जिम्मेदारी संभाली है। जिससे वह ‘दादा’ की इच्छा अनुसार समीक्षा समिति का गठन कर न्याय देगी क्या? ऐसा सवाल उपस्थित होकर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार दादा की इच्छा का मान रख तत्काल चंद्रपुर के तर्ज पर समीक्षा समिति का गठन करें, ऐसी मांग भी डा. प्रमोद सालवे ने की है। डा। सालवे ने जिलाधीश के माध्यम से मुख्यमंत्री को इस संदर्भ में ज्ञापन भी भिजवाया है।
गड़चिरोली जिला विकास की दिशा में बढ़ रहा है। लेकिन दूसरी ओर कुछ पाखंडी लोग शराबबंदी के नाम पर अड़े होने के कारण जिले का विकास रुका हुआ है। शराबबंदी के नाम पर और नशामुक्ति के लिए सरकार से करोड़ों रुपयों का अनुदान लूटा जा रहा है। विशेषत : जिले में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद भी वर्तमान स्थिति में जिले में गांव-गांव में शराब मिल रही है। पुलिस विभाग द्वारा आए दिन लाखों रुपयों की शराब पकड़ने के बाद भी जिले में शराब बिक्री पर लगाम नहीं लग पा रहा है। इसके विपरित अवैध शराब विक्रेताओं से बड़े पैमाने पर वसूली करने के लिए वसूली पथक कार्यरत है। जिससे सरकार का करोड़ों रुपयों का राजस्व डूब रहा है। जिससे सरकार चंद्रपुर जिले के तर्ज पर गड़चिरोली जिले में शराबबंदी संदर्भ में समीक्षा समिति गठित करें, ऐसी मांग डा। प्रमोद सालवे की है।
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