PM मोदी और सेना के खिलाफ टिप्पणी पड़ी भारी, पुणे की टीचर पर हाई कोर्ट का एक्शन
Pune News: पुणे में एक टीचर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सेना के खिलाफ टिप्पणी करना महंगा पड़ा। पुणे की टीचर के खिलाफ अब मुंबई हाई कोर्ट ने एक्शन लिया है।
- Written By: प्रिया जैस
बॉम्बे हाई कोर्ट (सौजन्य-एएनआई)
Pune News: पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई के तहत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। इसी सैन्य अभियान के दौरान पुणे की एक शिक्षिका ने एक व्हाट्सएप ग्रुप पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी के खिलाफ पुणे में शिक्षिका के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
शिक्षिका ने इस मामले को रद्द कराने के लिए मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने यह याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एफआईआर में दर्ज जानकारी और अपराध में लगे आरोपों को देखते हुए याचिका को खारिज करना उचित है। यह सुनवाई न्यायमूर्ति अजय एस. गडकरी और न्यायमूर्ति राजेश एस. पाटिल की खंडपीठ के समक्ष हुई। कोर्ट ने 46 वर्षीय महिला शिक्षिका की याचिका को नामंजूर कर दिया।
मुंबई उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने याचिका खारिज की
गौरतलब है कि 15 मई को पुणे में यह एफआईआर दर्ज की गई थी। मुंबई उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दुरुपयोग पर नाराजगी व्यक्त की। खंडपीठ ने कहा कि भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गलत इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करना, उच्च पदस्थ नेताओं पर बेबुनियाद आरोप लगाना और ऐसी सामग्री डालना जिससे लोगों में नाराजगी फैले या उनकी भावनाएं आहत हों, यह आजकल कुछ लोगों की फैशन बन गई है।
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वॉट्सएप पर टिप्पणी बनी मुसीबत
एफआईआर की जानकारी के अनुसार, जिस सोसाइटी में शिक्षिका रहती हैं, वहां की महिलाओं का एक व्हाट्सएप ग्रुप है, जिसमें कुल 380 सदस्य हैं। 7 मई को जब ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ की शुरुआत हुई, तब ग्रुप के कई सदस्यों ने इस अभियान की सराहना की। लेकिन याचिकाकर्ता (शिक्षिका) ने ग्रुप पर यह टिप्पणी की कि इस ग्रुप का उपयोग राष्ट्रीय न्यूज चैनल की तरह नहीं किया जाना चाहिए।
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इसके जवाब में एक सदस्य ने कहा कि यह समय देश के प्रति देशभक्ति दिखाने का है। इस संदेश पर याचिकाकर्ता ने हंसने वाली इमोजी भेजी और कुछ अन्य संदेश भी भेजे। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की थीं।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने उच्च न्यायालय में दलील दी कि उनकी मुवक्किल ने ये संदेश मानसिक रूप से ठीक स्थिति में न होने के कारण भेजे थे। कुछ संदेश तुरंत डिलीट भी कर दिए थे। शिकायत मिलने के बाद माफी भी मांग ली थी। इन संदेशों के चलते उन्हें पहले ही काफी नुकसान उठाना पड़ा है – जैसे कि उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया है।
