मेरी सुरक्षा और गाड़ियां वापस ले सरकार, जानें सांसद सुप्रिया सुले की इस अपील के पीछे क्या है कारण?
Supriya Sule's Appeal: सांसद सुप्रिया सुले ने ऊर्जा और आर्थिक संकट के मद्देनजर अपनी सरकारी सुरक्षा और वाहन वापस लेने का अनुरोध किया है। जानें उनके इस साहसी फैसले के पीछे की पूरी कहानी।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
Supriya Sule Requests To Remove Police Security: NCP (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले अपनी सादगी और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए जानी जाती हैं। लेकिन हाल ही में उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया है जिसकी जमकर चर्चा हो रही है। सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार से अपील की है कि उनके लिए तैनात किया गया पुलिस बंदोबस्त और उन्हें दी गई सरकारी गाड़ियां तत्काल प्रभाव से वापस ले ली जाएं।
भीषण आर्थिक और ऊर्जा संकट का दिया हवाला
सुप्रिया सुले ने अपने इस फैसले के पीछे किसी राजनीतिक कारण को नहीं, बल्कि देश की वर्तमान स्थिति को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में भारत एक गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में ईंधन और सरकारी संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है।
उन्होंने अपने संदेश में लिखा
देश के सामने ऊर्जा और आर्थिक संकट खड़ा है। संसाधनों को बचाने की जरूरत है। इसलिए सरकार मेरी सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल और वाहनों को तुरंत हटा ले। जब स्थिति सुधर जाए, तब समीक्षा के बाद जरूरत पड़ने पर इस पर विचार किया जा सकता है।
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सध्या भारतासमोर भीषण आर्थिक तसेच उर्जासंकट उभा राहिले आहे. परिणामी इंधन आणि इतर संसाधनांचा जपून वापर करण्याची गरज निर्माण झाली आहे. या पार्श्वभूमीवर माझे शासनाला नम्र आवाहन आहे की, कृपया आपण माझ्या सुरक्षेसाठी दिलेला पोलीस बंदोबस्त आणि त्यासोबत दिलेली वाहने तातडीने काढून घ्यावी.… — Supriya Sule (@supriya_sule) May 16, 2026
सुरक्षा पर होने वाले खर्च को बचाने की कोशिश
सुप्रिया सुले का मानना है कि एक सांसद के साथ चलने वाली पुलिस वैन, सुरक्षाकर्मियों का काफिला और गाड़ियों पर जनता के टैक्स का भारी पैसा खर्च होता है। साथ ही, इन वाहनों में ईंधन की भी बड़ी खपत होती है। सुले के अनुसार, यदि वे अपनी सुरक्षा छोड़ती हैं, तो इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा, बल्कि वह ईंधन और पुलिस बल किसी और जरूरी काम में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
संवेदनशीलता की मिसाल
राजनीतिक गलियारों में सुप्रिया सुले के इस फैसले को एक मास्टरस्ट्रोक और संवेदनशीलता की मिसाल माना जा रहा है। जहां एक ओर नेताओं में Z+ और उच्च श्रेणी की सुरक्षा लेने की होड़ मची रहती है, वहीं सुले का स्वेच्छा से इसे त्यागना एक बड़ा संदेश देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और संसाधनों की बचत उनके व्यक्तिगत प्रोटोकॉल से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
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सोशल मीडिया पर मिली सराहना
सुप्रिया सुले के इस निर्णय के बाद इंटरनेट पर लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। आम नागरिकों का कहना है कि अगर हर राजनेता इसी तरह संसाधनों के प्रति जागरूक हो जाए, तो देश के आर्थिक संकट को दूर करने में बड़ी मदद मिल सकती है। हालांकि, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार उनके इस अनुरोध पर क्या फैसला लेती है और क्या अन्य नेता भी इस राह पर चलते हैं।
