बारामती के पश्चिमी गांवों में जल संकट गहराया: सूखे कुएं, टैंकरों पर निर्भर ग्रामीण, आंदोलन की चेतावनी
Baramati Water Crisis News: बारामती के मुर्ती, पलशी और मुढाले जैसे गांवों में मार्च में ही जल स्रोत सूखे। योजनाओं के बावजूद ग्रामीण टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर, पलायन का खतरा और आंदोलन की चेतावनी।
- Written By: रूपम सिंह
Baramati Water Crisis (सोर्स- सोशल मीडिया)
Maharashtra Bhatghar Dam News: बारामती तहसील के पश्चिमी क्षेत्र के मुर्ती, पलशी, मुढाले, कोहाले बुद्रुक और थोपटेवाडी जैसे गांवों में भीषण जल संकट पैदा हो गया है, जहां कुओं ने अपना तल छू लिया है। इस क्षेत्र के नाले, नाले और कुएं बारिश के बाद दो-तीन महीने तक पानी से लबालब भरे रहते हैं, लेकिन इस साल गर्मी की शुरुआत में ही ये पूरी तरह सूखकर सूखे पड़ गए हैं। पश्चिमी हिस्से के ग्रामीणों को भीषण पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
कागजों पर योजनाएं, धरातल पर प्यास
विडंबना यह है कि जलापूर्ति योजनाएं या जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं केवल कागजों पर ही तैयार दिख रही है। आम जनता के लिए पानी की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में कई लोगों ने फरवरी महीने से ही टैंकरों से पानी खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करना शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि प्रशासन तुरंत उपाय योजना करे, अन्यथा आंदोलन किया जाएगा। इस क्षेत्र के यास से जल जीवन मिशन, पुरंदर उपसा और नीरा बाई नहर जैसे पानी के मुख्य स्रोत गुजरते है। इस नहर में जिले के भौर और वेल्हे तहसील के भाटघर, नीरा देवघर और गुंजवणी बांधों से वीर बांध में पानी जमा होता है और फिर नीरा बाई नहर के जरिए आगे आता है।
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आम जनता के सामने पीने के पानी के साथ खेती के पानी की भी गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। यदि आने वाले समय में प्रशासन द्वारा पानी का उचित नियोजन नहीं किया गया, तो नागरिकों को बड़े पैमाने पर जल संकट का सामना करना पड़ेगा, प्रशासन को योग्य उपाय कर पानी की समस्या हल करनी चाहिए, अन्यथा हम पानी के लिए आंदोलन करेंगे। (सोमनाथ जाधव, कुरणेवाडी )
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प्रशासनिक उदासीनता, किसान पानी से वंचित
वडगांव निबालकर क्षेत्र में गर्मी की आहट मिलते ही जल संकट की तीव्र लहर महसूस होने लगी है। मार्च की शुरुआत में ही बढ़ते तापमान ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे पीने के पानी के साथ-साथ खेती के पानी की भी समस्या खड़ी हो गई है। जमीन का भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। बारामती के ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति सुचारू करने के लिए ग्राम स्तर या तहसील स्तर का प्रशासन प्रयास करता नहीं दिख रहा है। प्रशासन की उदासीनता के कारण किसानों और गरीबों को पानी से वंचित रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के पलायन करने का बढ़ रहा खतरा
कई इलाकों में पास ही बांध, फिर भी प्यासा गला जैसी स्थिति पैदा हो गई है। बारामती के कई हिस्सों से पुरंदर उपसा, नीरा बाई नहर और नीरा नदी जैसे पानी के स्रोत होने के बावजूद प्रशासन इस पर सोता हुआ नजर आ रहा है। आने वाले अगले तीन महीनों तक पानी की समस्या और विकराल होने की आशंका है, जिसके कारण कई लोग पलायन करने लगे है। इस समस्या पर गुट विकास अधिकारी किशोर माने से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
