Baramati And Rahuri Byelection Congress (फोटो क्रेडिट-X)
Baramati And Rahuri Byelection Congress: महाराष्ट्र की राजनीति में दो प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले आगामी मतदान को लेकर स्थिति अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। राज्य के पुणे और अहमदनगर जिलों की रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव अब निर्विरोध संपन्न नहीं होंगे। सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी गुटों के बीच आम सहमति बनाने के तमाम प्रयास विफल साबित हुए हैं। सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी ने इन दोनों क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है, जिससे मुकाबला अब त्रिकोणीय या आमने-सामने का होना तय माना जा रहा है। विशेष रूप से पश्चिमी महाराष्ट्र की सबसे चर्चित सीट पर सबकी निगाहें टिकी थीं।
दिवंगत नेता के आकस्मिक निधन के बाद खाली हुई इन सीटों पर सहानुभूति की लहर के बीच निर्विरोध निर्वाचन की अपील की जा रही थी। हालांकि, विपक्षी खेमे ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकतंत्र में चुनाव और व्यक्तिगत संवेदनाएं दो अलग विषय हैं। इसी रुख को अपनाते हुए संगठन ने इच्छुक दावेदारों के आवेदन मंगाए और उनकी पात्रता की जांच शुरू कर दी है। इस निर्णय से उन कयासों पर विराम लग गया है जिनमें कहा जा रहा था कि मुख्य विपक्षी दल इन चुनावों से दूरी बना सकते हैं। अब दोनों ही क्षेत्रों में चुनावी गहमागहमी तेज हो गई है।
पार्टी आलाकमान ने इन दोनों महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए इच्छुक कार्यकर्ताओं और नेताओं के ऑनलाइन साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली है। मिली जानकारी के अनुसार, महत्वपूर्ण सीट के लिए कुल छह दावेदारों ने अपनी इच्छा जताई है, जबकि दूसरी रिक्त सीट के लिए चार आवेदन प्राप्त हुए हैं। संगठन के प्रदेश नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यदि उनके सहयोगी दल इन सीटों पर दावा नहीं करते हैं, तो वे अपने चिन्ह पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा अगले एक-दो दिनों में होने की संभावना है।
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प्रशासन द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, इन क्षेत्रों में नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि छह अप्रैल निर्धारित की गई है। इसके अगले दिन प्राप्त आवेदनों की सूक्ष्म जांच की जाएगी और नौ अप्रैल तक नाम वापसी का विकल्प खुला रहेगा। वास्तविक मतदान की प्रक्रिया तेईस अप्रैल को संपन्न होगी, जिसके बाद चार मई को बारामती-राहुरी उपचुनाव परिणामों की घोषणा की जाएगी। इस विस्तृत समय सारिणी के जारी होने के बाद सभी राजनीतिक दलों ने अपनी जमीनी तैयारियां और जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। निर्वाचन आयोग ने भी शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
विपक्षी गठबंधन के भीतर इस कदम को लेकर गहन मंथन चल रहा है। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि यह मुकाबला संयुक्त रूप से लड़ा जाएगा या कोई विशेष दल स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरेगा। प्रदेश अध्यक्ष ने संकेत दिया है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी मित्र दलों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भी अपनी रणनीति को दोबारा तैयार करने में जुट गए हैं ताकि बढ़ती चुनौती का मजबूती से सामना किया जा सके। आने वाले सप्ताह में होने वाले नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया से स्थिति और अधिक साफ हो जाएगी।