बारामती उपचुनाव: सुनेत्रा पवार की ‘निर्विरोध’ राह में रोड़ा, निर्दलीय बिगाड़ेंगे खेल; क्या है विपक्ष का रुख?
Baramati By-election 2026: अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई बारामती सीट पर निर्विरोध चुनाव की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
- Written By: आकाश मसने
सुनेत्रा पवार (डिजाइन फोटो)
Ajit Pawar Successor In Baramati: महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे चर्चित केंद्र ‘बारामती’ एक बार फिर चुनावी तपिश महसूस कर रहा है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 23 अप्रैल 2026 को बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। हालांकि, सत्ता पक्ष और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से इस चुनाव को निर्विरोध संपन्न कराने की इच्छा जताई गई थी, लेकिन नामांकन के पहले ही दिन जो तस्वीर सामने आई है, उसने समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।
निर्विरोध की कोशिशों को लगा झटका
महाराष्ट्र में यह परंपरा रही है कि किसी दिग्गज नेता के असामयिक निधन के बाद उनके परिवार के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए अक्सर विपक्षी दल उम्मीदवार नहीं उतारते। पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई बारामती विधानसभा सीट पर भी ऐसी ही चर्चा थी। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की ओर से अजित पवार की पत्नी व राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार इस सीट से चुनाव लड़ेंगी। महायुति सुनेत्रा को निर्विरोध निर्वाचित करने की तैयारी थी, लेकिन नामांकन के पहले दिन ही तीन उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल कर इन संभावनाओं पर पानी फेर दिया है।
बाहरी उम्मीदवारों ने ठोक दी ताल
हैरानी की बात यह है कि बारामती की चुनावी जंग में उतरने वाले पहले तीन उम्मीदवार पुणे जिले के बाहर के हैं। इन बाहरी उम्मीदवारों की एंट्री ने यह साफ कर दिया है कि बारामती की राह सुनेत्रा पवार के लिए इतनी आसान नहीं होने वाली है।
सम्बंधित ख़बरें
प्राइवेट NEET कोचिंग सेंटरों पर चलेगा सरकार का हथौड़ा! राजस्व मंत्री विखे पाटिल ने की पाबंदी की मांग
कल शिंदे सेना में गए, आज शरद पवार के सिल्वर ओक पहुंचे आनंद परांजपे; महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बढ़ा सस्पेंस
महायुति में मुख्यमंत्री की म्युटिनी! कडू के बयान पर भड़की भाजपा; क्या खुद के चक्रव्यूह में फंस गए फडणवीस?
छत्रपति संभाजीनगर का अंतिम विकास प्रारूप मंजूर, 22 सड़कों की चौड़ाई घटी; मनपा का टीडीआर मुआवजा फंसा संकट में
- सतीश कृष्णा कदम (हिंदुस्तान जनता पार्टी) – सांगली जिला, जत तालुका
- सागर शरद भिसे (निर्दलीय) – सातारा
- राघू घुटुकडे (न्यू राष्ट्रीय समाज पार्टी) – सोलापुर
लक्ष्मण हाके की सीधी चुनौती
इससे पहले ओबीसी नेता लक्ष्मण हाके ने इस उपचुनाव में उतरने का ऐलान कर मुकाबले को वैचारिक और राजनीतिक मोड़ दे दिया है। हाके का तर्क है कि “लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए चुनाव होना अनिवार्य है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अगले दो दिनों में आधिकारिक उम्मीदवार के नाम की घोषणा करेंगे। हाके ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में रमेश वांजले और लक्ष्मण जगताप जैसे नेताओं के निधन के बाद भी उपचुनाव लड़े गए थे, तो बारामती में यह ‘परंपरा’ क्यों बदली जा रही है?
यह भी पढ़ें:- महाराष्ट्र प्रशासन में बड़ा फेरबदल, तुकाराम मुंढे का 24वां तबादला, 10 IAS अफसरों की नई नियुक्तियां, देखें सूची
विपक्षी गठबंधन MVA ने भी बदला अपना रुख
सिर्फ निर्दलीय या छोटे दल ही नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी (MVA) के भीतर भी हलचल तेज है। पहले कहा जा रहा था कि अजित पवार के सम्मान में विपक्ष इस सीट से उम्मीदवार नहीं उतारेगा। लेकिन अब कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) इस सीट पर दावा नहीं करती है, तो कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारने के लिए तैयार है। कांग्रेस ने कोल्हापुर उत्तर उपचुनाव का हवाला देते हुए कहा कि जब भाजपा ने वहां उम्मीदवार उतारा था, तो बारामती में रियायत की उम्मीद क्यों की जाए?
कुल मिलाकर, बारामती उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया है। जहां एक ओर सुनेत्रा पवार के समर्थक देवी एकवीरा के दर पर जीत की दुआ मांग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विरोधियों ने घेराबंदी शुरू कर दी है।
