कल शिंदे सेना में गए, आज शरद पवार के सिल्वर ओक पहुंचे आनंद परांजपे; महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बढ़ा सस्पेंस
Anand Paranjape Silver Oak meeting: आनंद परांजपे ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के तुरंत बाद शरद पवार से मुलाकात कर सबको चौंका दिया है। जानिए इस मुलाकात के पीछे की पूरी कहानी।
- Written By: गोरक्ष पोफली
आनंद परांजपे की शरद पवार से मुलसकात (सोर्स: सोशल मीडिया)
Anand Paranjape Meets Sharad Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित भी नहीं लगा पाते। ताजा मामला पूर्व सांसद और NCP (अजित पवार गुट) के मुख्य प्रवक्ता रहे आनंद परांजपे से जुड़ा है। गुरुवार को अजित पवार का साथ छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले परांजपे ने शुक्रवार को अचानक राकांपा (शरद पवार) के अध्यक्ष शरद पवार के मुंबई स्थित आवास सिल्वर ओक पर जाकर उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म हो गया है।
मुलाकात के बाद परांजपे की सफाई
अचानक हुई इस मुलाकात से मचे हड़कंप के बीच आनंद परांजपे ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, आदरणीय शरद पवार साहब हमेशा से मेरे श्रद्धास्थान रहे हैं। वे कल भी मेरे लिए पूजनीय थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे। मैं लगभग तीन साल बाद उनसे एक सदिच्छा भेट करने गया था। इस मुलाकात में उन्होंने कई पुरानी यादों को ताजा किया। मैंने उनका आशीर्वाद लिया और उन्होंने मुझे मेरी नई राजनीतिक पारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
परांजपे ने यह भी साफ किया कि वे शरद पवार से मिलने जा रहे हैं, इस बात की जानकारी उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पहले ही दे दी थी, इसलिए किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
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अजित पवार गुट से क्यों नाराज थे आनंद परांजपे?
आनंद परांजपे ठाणे में राकांपा का एक बड़ा चेहरा माने जाते थे। अजित पवार ने उन्हें ठाणे शहर प्रमुख और बाद में पार्टी का मुख्य प्रवक्ता भी बनाया था। लेकिन पिछले कुछ समय से वे पार्टी के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। परांजपे विधान परिषद (MLC) या राज्यसभा के लिए टिकट की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया। इसी अस्वस्थता और नाराजगी के चलते उन्होंने आखिरकार एनसीपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
आनंदाश्रम में छलके आंसू
मूल रूप से शिवसैनिक रहे आनंद परांजपे के पिता प्रकाश परांजपे के निधन के बाद वे राजनीति में आए थे। साल 2008 (उपचुनाव) और 2009 के लोकसभा चुनाव में वे शिवसेना के टिकट पर ठाणे से सांसद चुने गए थे। हालांकि, 2012 में उन्होंने एनसीपी का दामन थाम लिया था।
पूरे 14 साल बाद जब वे दोबारा शिवसेना में लौटे, तो भावुक क्षण देखने को मिला। शुक्रवार को जब परांजपे ठाणे के प्रसिद्ध टेंभी नाका स्थित आनंदाश्रम पहुंचे और दिवंगत आनंद दिघे की प्रतिमा को नमन किया, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने रुंधे गले से पत्रकारों से कहा, आज मेरी असली घरवापसी हुई है।
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क्या हैं इस मुलाकात के राजनीतिक मायने?
भले ही आनंद परांजपे इसे एक औपचारिक और सदिच्छा मुलाकात बता रहे हों, लेकिन राजनीति में कुछ भी बिना वजह नहीं होता। एकनाथ शिंदे की शिवसेना में प्रवेश करने के तुरंत बाद शरद पवार के घर जाना दिखाता है कि परांजपे भविष्य के लिए अपने सभी रास्ते और मधुर संबंध खुले रखना चाहते हैं। ठाणे की राजनीति में इस दलबदल और मेल-मुलाकात का असर आने वाले चुनावों में साफ देखने को मिल सकता है।
