छत्रपति संभाजीनगर का अंतिम विकास प्रारूप मंजूर, 22 सड़कों की चौड़ाई घटी; मनपा का टीडीआर मुआवजा फंसा संकट में
Sambhajinagar Development: सरकार ने छत्रपति संभाजीनगर के अंतिम विकास प्रारूप को मंजूरी दे दी है, जिसमें 22 प्रमुख सड़कों की चौड़ाई कम की गई है मनपा द्वारा दिए गए टीडीआर मुआवजे पर संकट खड़ा हो गया है।
- Written By: रूपम सिंह
छत्रपति संभाजीनगर (फोटो- सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar Development Plan Approval: छत्रपति संभाजीनगर राज्य सरकार ने शहर की अंतिम विकास प्रारूप (डीपी) को ‘एक्सक्लूडेड पार्ट’ (ईपी) सहित मंजूरी दे दी है। हालांकि इसमें 22 प्रमुख सड़कों की चौड़ाई कम कर दी गई है। खास बात यह है कि मनपा ने इन सड़कों को पहले की तरह चौड़ा रखने का प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजा था, लेकिन अंतिम योजना में उसको नजरअंदाज कर दिया गया।
मंजूर ईपी में इन सड़कों की अलाइनमेंट बदलकर उन्हें छोटा कर दिया गया है। इससे मनपा के सामने बड़ा प्रशासनिक व आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि इन सड़कों के लिए मनपा पहले ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है व प्रभावित संपत्ति धारकों को टीडीआर के रूप में करोड़ों रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। विकास प्रारूप तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने श्रीकांत देशमुख की नियुक्ति की थी।
तैयार प्रस्तावित भूमि उपयोग नक्शे (पीएलयू) में 22 प्रमुख सड़कों की चौड़ाई कम किए जाने की बात मनपा के ध्यान में आई थी। इसके बाद तत्कालीन प्रशासक जी श्रीकांत ने इस पर आपत्ति जताते हुए इन सड़कों को पुराने प्रारूप के अनुसार चौड़ा रखने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इस मुद्दे पर सुनवाई भी हुई, लेकिन अंतिम प्रारूप जारी होने के बाद स्पष्ट हो गया कि मनपा के प्रस्ताव को दरकिनार कर दिया गया।
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अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि जिन अतिरिक्त जमीनों का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है व जिनके बदले टीडीआर दिया गया है, उनका क्या होगा। सूत्रों के अनुसार सरकार ने इस समस्या पर एक वैकल्पिक सुझाव दिया है। जिन जगहों पर सड़क की चौड़ाई कम होने से अतिरिक्त जमीन बच जाएगी, वहां पार्किंग की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है। वहीं जिन सड़कों की एक तरफ की अलाइनमेंट बदली गई है, वहां नई जमीन का अधिग्रहण कर दोबारा टीडीआर देने की बात भी उल्लेखित की गई है।
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8,855 आपत्तियों पर की गई सुनवाई
विकास योजना प्रक्रिया के दौरान छत्रपति संभाजीनगर शहर के 8 हजार 855 नागरिकों ने आपत्तियां व सुझाव दर्ज कराए थे। उन पर सुनवाई कर कुछ बदलाव भी किए गए, लेकिन मनपा के आधिकारिक प्रस्ताव को ही अंतिम योजना में शामिल नहीं किए जाने से आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। इससे पहले विकास योजना के लिए सरकार ने अलग यूनिट नियुक्त की थी। तत्कालीन शहरी नियोजन उप निदेशक रजा खान ने ईएलयू व पीएलयू तैयार कर सरकार को सौंपा था। बाद में न्यायालय के आदेश के बाद देशमुख की नियुक्ति की गई व नाशिक की एक निजी एजेंसी के माध्यम से नया पीएलयू तैयार किया गया।
