'हिंदी हमारी लाडली बहन'; सरनाईक के बयान पर मचा सियासी बवाल, उद्धव गुट और मनसे ने दी चेतावनी

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हिंदी को मुंबई की बोलचाल की भाषा बताते हुए विवाद खड़ा कर दिया है। उनके इस बयान से मराठी भाषी समुदाय नाराज हैं।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक (photo credit; social media)
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक (photo credit; social media)
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मुंबई: भारत के सबसे ज्यादा प्रांतो में जानेवाली हिंदी भाषा को देश की राष्ट्रभाषा बनने के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। मुंबई, महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में हिंदी विरोधी सुर अक्सर सुनने को मिल जाते हैं। लेकिन इन सबके बीच राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हिंदी को लेकर शनिवार को कहा कि हिंदी अब मुंबई की आम बोलचाल की भाषा बन गई है और हिंदी हमारी प्यारी बहन है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के इस बयान की हिंदी भाषी लोग सराहना कर रहे हैं। लेकिन हिंदी विरोधियों को सरनाईक का बयान हजम नहीं हो रहा है। सरनाईक के बयान से राज्य में हिंदी बनाम मराठी ऐसा नया विवाद छिड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

हिंदी मुंबई की बोलचाल भाषा

मुंबई में एक कार्यक्रम में बोलते हुए मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि हिंदी अब मुंबई की बोलचाल की भाषा बन गई है। हम मराठी को अपनी मातृभाषा कहते हैं, लेकिन हमारे मुंह से कभी हिंदी निकलती है तो कभी अंग्रेजी। इसलिए, हिंदी अब हमारी बोलचाल की भाषा बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि ठाणे और मीरा-भायंदर मेरे निर्वाचन क्षेत्र हैं। जब मैं वहां के लोगों से बात करता हूं, तो मैं शुद्ध मराठी में बोलता हूं। लेकिन, जब मैं मीरा-भायंदर से आगे जाता हूं, तो मेरे मुंह से अपने आप हिंदी निकलने लगती है। हम कहते हैं कि मराठी हमारी मातृभाषा है, हमारी मां है। लेकिन हिंदी हमारी लाडली बहन है। क्योंकि हमारी लाडली बहनों की वजह से ही आज हम 237 से आगे निकल गए हैं।

मनसे ने किया विरोध

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पूर्व विधायक राजू पाटिल ने कहा कि  मराठी मां है लेकिन हिंदी मौसी नहीं, पूतना मौसी है। तो वही मनसे नेता  यशवंत किल्लेदार ने कहा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अपने मंत्रियों पर लगाम लगानी चाहिए। वोटों की मजबूरी में मराठी और मुंबई में गंदी राजनीति हमें मंजूर नहीं है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के रूप में हम महाराष्ट्र और मराठी लोगों के लिए लड़ेंगेॉ। मराठी, मेरे राजा, राज्य, मुंबई और मेरे पिता के पूर्वजों की भाषा है। क्या प्रताप सरनाईक को पता नहीं है कि मुंबई मराठी लोगों की है? इससे पहले उनके मंत्री यह तर्क देते रहे थे कि हिंदी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए।

राऊत का अमित शाह पर निशाना

महाराष्ट्र में मराठी लोगों को सम्मान मिले, मराठी लोग स्वाभिमान के साथ जी सकें। इसके लिए शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की थी। लेकिन अब आप देख रहे हैं कि खुद को बालासाहेब के वारिस कहने वाले लोग मराठी लोगों को लेकर क्या रुख अपना रहे हैं। दरअसल, यह उनका रुख नहीं है, बल्कि यह बीजेपी और अमित शाह का रुख है।

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