वर्धा: पॉश कानून के सख्त क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को अधिकार, समिति गठन नहीं करने पर ₹50 हजार तक जुर्माना

Wardha Women Safety: वर्धा में पॉश (POSH) कानून के तहत 10 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में आंतरिक समिति गठन अनिवार्य किया गया है। उल्लंघन करने पर ₹50,000 का जुर्माना लगेगा।
Implementation of the POSH Act intensified in Wardha; employers failing to set up an Internal Complaints Committee will face a penalty of up to ₹50,000.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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Wardha Women Safety Internal Complaints Committee: कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से सुरक्षा के लिए लागू पॉश (POSH) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन तथा संस्थानों की जांच के लिए विभिन्न स्तरों के सरकारी अधिकारियों को अधिकृत किया गया है। इसमें आंगनवाड़ी सेविकाओं के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं को भी निरीक्षण अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रत्येक संस्थान की जांच के लिए अधिकारी

कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकार ने परिपत्र जारी कर कानून के अधिक प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रत्येक संस्थान की जांच के लिए अधिकारियों को अधिकृत किया है।

जिन संस्थानों में 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां संस्था प्रमुख द्वारा आंतरिक समिति का गठन करना अनिवार्य है। साथ ही 10 से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों में शिकायत निवारण हेतु जिला स्तर पर स्थानीय समिति का गठन किया गया है। जिले के लिए निवासी उपजिल्हाधिकारी को वर्धा जिला अधिकारी घोषित किया गया है।

कार्यालय की वरिष्ठ महिला होगी अध्यक्ष

  • आंतरिक समिति में कार्यालय की वरिष्ठ महिला अध्यक्ष होगी। साथ ही प्राथमिकता के आधार पर उन कर्मचारियों में से कम से कम दो सदस्य होंगे जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति संवेदनशील हों या जिन्हें सामाजिक कार्य का अनुभव हो या कानून की जानकारी हो।
  • इसके अलावा किसी गैर-सरकारी संगठन या संघ से संबंधित, या लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े मुद्दों से परिचित एक व्यक्ति सदस्य होगा। समिति में कम से कम 50 प्रतिशत महिला सदस्य होंगी और समिति का कार्यकाल 4 वर्ष का होगा।
  • जिन कार्यालयों में 10 से कम कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्हें अपनी शिकायत स्थानीय शिकायत समिति में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के कार्यालय में दर्ज करनी होगी।
  • पीड़ित महिलाएं ऑनलाइन प्रणाली या "बॉक्स" के माध्यम से भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकती हैं।
  • अधिनियम की धारा 26 के अनुसार जो कार्यालय आंतरिक शिकायत समिति का गठन नहीं करेगा, उसके मालिक/प्रमुख पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, ऐसा जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी द्वारा सूचित किया गया है।
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