अजित पवार और बारामती: सात बार विधायक बनने से लेकर बारामती मॉडल गढ़ने तक का राजनीतिक सफर

Ajit Pawar Birth Anniversary: बारामती और अजित पवार का नाता 1991 से अटूट रहा है। 'बारामती विकास मॉडल', सहकारी आंदोलन और तेज प्रशासनिक फैसलों ने उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत बनाया।
Ajit Pawar's political legacy is deeply rooted in Baramati। From 1991, his focus on the cooperative sector and development model shaped Maharashtra's politics
अजीत पवार डिजाइन इमेज (फोटो सोर्स- नवभारत)
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अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बारामती से की और यह क्षेत्र हमेशा उनकी राजनीति का केंद्र रहा। पवार बारामती से महाराष्ट्र विधानसभा के लिए सात बार निर्वाचित हुए पहली बार 1991 के उपचुनाव में और बाद में 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में - और उन्होंने कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं
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बारामती को ग्रामीण और औद्योगिक विकास के एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में स्थापित करने में उनका सबसे बड़ा योगदान था। उन्होंने यहाँ बेहतरीन शैक्षिक संस्थान, आधुनिक कृषि तकनीक, और एमआईडीसी के जरिए बड़े उद्योगों का जाल बिछाया
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अजितदादा के नाम से मशहूर, वे अपने आक्रामक प्रशासनिक कामकाज और जनता की समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए जाने जाते थे। वे अक्सर मंत्रालय से ज्यादा बारामती के लोगों के बीच रहना पसंद करते थे।
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महाराष्ट्र की राजनीति में सहकारी संस्थाओं का बड़ा महत्व है। अजित पवार ने बारामती और पूरे पुणे जिले में चीनी मिलों, दुग्ध संघों और सहकारी बैंकों (जैसे पुणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक) के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।
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जिस शहर ने अजित पवार को पहचान दिलाई, वही शहर उनकी मृत्यु का साक्षी बना। वो शहर है बारामती।

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