पूजा खेडकर को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत, 26 सितंबर तक गिरफ्तारी पर रोक, पुलिस को दिए ‘ये’ निर्देश
यूपीएससी ने पिछले महीने खेडकर के खिलाफ कई कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें फर्जी पहचान बताकर सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना भी शामिल था।
- Written By: किर्तेश ढोबले
Year Ender 2024: इस साल सुर्खियों में रहा आईएएस पूजा खेडकर का मामला, UPSC ने ऐसे सिखाया सबक
मुंबई/नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट से बर्खास्त पूर्व ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पूजा खेडकर की अंतरिम संरक्षण की अवधि 26 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी है। साथ ही अदालत ने पुलिस को मामलें की 10 दिन में विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए है। मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी। इससे पहले हाई कोर्ट ने 29 अगस्त को खेडकर को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम संरक्षण की अवधि पांच सितंबर तक के लिए बढ़ा दी थी।
इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में पूजा खेडकर के दस्तावेज जाली होने का दावा किया है। पुलिस ने कहा कि पूर्व आईएएस परिवीक्षाधीन अधिकारी पूजा खेडकर ने कई प्रकार की दिव्यांगता दिखाने के लिए दो प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे और उसकी जांच से पता चला है कि इनमें से एक दस्तावेज ‘‘जाली’ और ‘‘मनगढ़ंत” हो सकता है।
दिव्यांगता कोटे का लाभ प्राप्त करने का आरोप
आपको पता हो कि खेडकर पर धोखाधड़ी और गलत तरीके से ओबीसी तथा दिव्यांगता कोटे का लाभ प्राप्त करने का आरोप है। एजेंसी ने कहा कि खेडकर ने क्रमशः सिविल सेवा परीक्षा-2022 और सिविल सेवा परीक्षा-2023 के लिए दो दिव्यांगता प्रमाणपत्र जमा किए हैं।
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दिव्यांगता प्रमाणपत्र जाली और मनगढ़ंत होने की आशंका
स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्यापन के बाद, ‘‘जारीकर्ता चिकित्सा प्राधिकरण, अहमदनगर, महाराष्ट्र” ने हालांकि दावा किया है कि ‘लोकोमोटर’ दिव्यांगता, श्रवण दोष और आंखों से कम दिखने संबंधी प्रमाणपत्र ‘‘सिविल सर्जन कार्यालय रिकॉर्ड” के अनुसार जारी नहीं किया गया था और ‘‘दिव्यांगता प्रमाणपत्र के जाली और मनगढ़ंत होने की अधिक आशंका है।
मामले की गहन जांच की आवश्यकता
यूपीएससी ने पिछले महीने खेडकर के खिलाफ कई कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें फर्जी पहचान बताकर सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना भी शामिल था। दिल्ली पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। यहां की एक सत्र अदालत ने एक अगस्त को खेडकर को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं, जिनकी ‘‘गहन जांच की आवश्यकता है”
(एजेंसी इनपुट के साथ)
