43 दिनों तक कैसे फरार रही निदा खान और सुरक्षित ठिकाने की पुलिस को कैसे लगी भनक? पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट
Nida Khan Arrest Ground Report SIT: TCS नासिक कांड की मुख्य आरोपी और 43 दिनों बाद पकड़ी गई निदा खान की गिरफ्तारी कैसे हुई। MIM पार्षद के फ्लैट में छिपी थी, ड्राइवर पहुँचाता था खाना। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
- Written By: अनिल सिंह
निदा खान की फरारी से गिरफ्तारी तक की इनसाइड स्टोरी (फोटो क्रेडिट-X)
Nida Khan Arrest SIT Nashik Operation: 23 मार्च को भिवंडी से अचानक गायब हुई निदा खान नासिक पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी। भद्रकाली के घास बाजार इलाके की एक साधारण पृष्ठभूमि वाली लड़की आखिर 43 दिनों तक इतने हाई-प्रोफाइल मामले में कैसे छिपी रही? इसका जवाब छत्रपति संभाजीनगर की कौसर कॉलोनी के एक सुनसान फ्लैट में मिला। नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने तकनीकी सर्विलांस के साथ-साथ ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ (मानवीय खुफिया जानकारी) का सहारा लेकर इस गुत्थी को सुलझाया।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि निदा और उसका पूरा परिवार एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल के मालिकाना हक वाले एक फ्लैट में शरण लिए हुए थे। बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे रहने के लिए उन्होंने तकनीक का इस्तेमाल बंद कर दिया था। पार्षद का ड्राइवर गोपनीय तरीके से उन्हें भोजन, चिकन और अन्य जरूरी सामान पहुँचाता था, ताकि किसी को भनक न लगे।
निजी वाहन और सादे कपड़ों में घेराबंदी
सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके और पीएसआई चेतन श्रीवंत की टीम ने इस ऑपरेशन को बेहद सावधानी से अंजाम दिया। नासिक पुलिस की गाड़ियाँ देखकर आरोपी सतर्क न हो जाएँ, इसलिए टीम ने अन्य जिलों की निजी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का इस्तेमाल किया। पुलिसकर्मी स्थानीय निवासियों की तरह नारेगांव की गलियों में घूमते रहे। उन्होंने स्थानीय पुलिस या पत्रकारों को भी इसकी सूचना नहीं दी, ताकि सूचना लीक होने का कोई खतरा न रहे।
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7 मई की आधी रात का एक्शन
लगातार तीन दिनों की रेकी के बाद, जब पुलिस को पुख्ता यकीन हो गया कि निदा खान उसी फ्लैट के अंदर है, तो 7 मई को अचानक धावा बोल दिया गया। निदा ने भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी इतनी मजबूत थी कि उसे समर्पण करना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, उसे पनाह देने वालों ने उसे पूरी सुरक्षा का भरोसा दिया था, लेकिन एसआईटी की मुस्तैदी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
कौन है असली मास्टरमाइंड?
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे फरारी कांड का खर्च कौन उठा रहा था? क्या मतीन पटेल केवल एक मोहरा है या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट काम कर रहा है? नासिक एसआईटी अब मतीन पटेल, उनके ड्राइवर और निदा के रिश्तेदारों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। कानून के मुताबिक, किसी फरार अपराधी को शरण देना एक संगीन जुर्म है, और जल्द ही इस मामले में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं।
