PM Modi के ड्रीम प्रोजेक्ट पर आयी नई अपडेट, पर्वत व पानी के अंदर गुजरने वाली सुरंगों का काम तेज
Bullet Train New Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में पहली बार टनल हुड्स तकनीक का उपयोग होगा। इससे सुरंगों में ‘सोनिक बूम’ कम होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित, शांत व आरामदायक बनेगी।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आलोक उमाकृष्ण
टनल हुड्स निर्माण (सोर्सः फाइल फोटो
PM Modi Dream Project Bullet Train New Update: पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट गुजरात के बाद अब महाराष्ट्र में तेजी से आकार ले रहा है। मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना कई मामलों में अनोखी है। मुंबई के बीकेसी से ठाणे तक जहां 21 किमी लंबी भूमिगत एवं पानी के अंदर सुरंग बनाई जा रही है,वहीं महाराष्ट्र में एवं गुजरात में पर्वतीय सुरंगों का काम भी तेजी से किया जा रहा है।
इन विशेष पहाड़ी सुरंगों के लिए देश में पहली बार टनल हुड्स तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में पर्वतीय सुरंग पोर्टल्स पर टनल हुड्स लगाए जा रहे हैं। यह भारत में पहली बार है जब रेलवे टनलों के लिए इस प्रकार की टनल हुड तकनीक को डिज़ाइन और लागू किया गया है।
क्यों होती है,टनल हुड्स की आवश्यकता ?
मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर कठिन भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजर रहा है। इसमें महाराष्ट्र के पालघर जिले में सात तथा गुजरात के वलसाड में एक पर्वतीय सुरंग शामिल है। इन पर्वतीय सुरंगों के दोनों सिरों पर टनल हुड्स बनाए जा रहे हैं। जब कोई हाई-स्पीड ट्रेन टनल में प्रवेश करती है, तो वह अपने आगे बड़ी मात्रा में हवा को धक्का देती है। ठीक वैसे ही जैसे एक पिस्टन सिलेंडर के अंदर चलता है। हवा के इस अचानक संपीड़न से प्रेशर वेव्स उत्पन्न होती हैं, जो टनल के भीतर फैलती हैं।
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यदि इनका सही तरीके से प्रबंधन नहीं किया जाए, तो ये प्रेशर वेव्स ट्रेन के टनल से बाहर निकलते समय तेज़ धमाके जैसी आवाज पैदा कर सकते हैं। इस तरह टनल हुड्स खुले वातावरण और सीमित टनल स्थान के बीच एक संक्रमण क्षेत्र के रूप में कार्य करते हैं। हवा को धीरे-धीरे प्रवेश और निकास की अनुमति देकर, वे प्रेशर में होने वाले बदलावों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इस तरह इस तकनीक से पूरे सिस्टम के एयरोडायनामिक परफॉरमेंस में सुधार होता है।
टनेल में बिना शोर गुजरेगी बुलेट ट्रेन
बताया गया कि हाईस्पीड बुलेट ट्रेन की पहाड़ी सुरंगों से आवाजाही के दौरान, टनल हुड विशेष रूप से टनल से बाहर निकलते समय उत्पन्न होने वाले टनल बूम और शोर को कम कर देगा। टनल हुड ट्रेन और हवा को एक-दूसरे के साथ धीरे-धीरे तालमेल बैठाने में मदद करता है। इससे हाई-स्पीड रेल यात्रा अधिक शांत, सुचारू और आरामदायक होगी।
विशेष प्रेशर-रिलीफ ओपनिंग्स
इन टनल हुड्स की एक विशिष्ट विशेषता सावधानीपूर्वक डिज़ाइन किए गए प्रेशर-रिलीफ वेंट्स या विंडोज़ हैं। ये विंडोज़ या ओपनिंग्स, जब ट्रेन टनल में प्रवेश करती है, तब संपीड़ित हवा के एक हिस्से को धीरे-धीरे वातावरण में बाहर निकलने की अनुमति देती हैं। इससे प्रेशर वेव्स की तीव्रता कम होती है, टनल बूम को न्यूनतम किया जाता है और वायु प्रवाह को अधिक सुचारू बनाए रखने में मदद मिलती है। विश्व के उन देशों में जहां ट्रेनें 300 कि.मी./घंटा से अधिक गति से चलती हैं। वहां पहाड़ी सुरंगों में इस तकनीक का उपयोग होता है।
मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए इस तकनीक का देश में पहली बार उपयोग होने पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपनी उन्नत इंजीनियरिंग की भी सराहना की। विश्व-स्तरीय मानकों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम तकनीकों का इस्तेमाल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में हो रहा है। बुलेट ट्रेन की सुरंग बनाने में अद्भुत इंजीनियरिंग की मिसाल कायम की जा रही है।
2027 तक पहला चरण खोलने की तैयारी
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का गुजरात में पहला चरण 2027 तक शुरू करने की तैयारी है। सूरत से बीलीमोरा के बीच बुलेट ट्रेन को दौड़ाने का प्लान है। जबकि बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र में सात पर्वतीय सुरंगों पर काम चल रहा है। महाराष्ट्र में 21 किमी लंबी सुरंग एवं स्टेशन के लिए 2029 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
हर माह तैयार हो रहा 15 किमी ट्रैक
महाराष्ट्र में सुरंग निर्माण के साथ गुजरात में बुलेट ट्रेन के ट्रैक का काम तेजी से हो रहा है। रोजाना 15 किमी तक का अत्याधुनिक ट्रैक तैयार किया जा रहा है। अत्याधुनिक तकनीक ने काम की गति काफी तेज कर दी है। रेल मंत्री के अनुसार, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को तैयार करने में दुनिया की सबसे बेहतर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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508.17 किमी का रूट
508.17 किमी की दूरी में बुलेट ट्रेन के रूट पर 12 स्टेशन हैं। जिनमें से 8 गुजरात में, 4 स्टेशन महाराष्ट्र में बन रहे हैं। यह रेल कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा।
