
महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के साथ सुरेश वरपुडकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
BJP Leader Suresh Varpudkar Family Defeat: महाराष्ट्र में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के नतीजों ने कई सियासी दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। परभणी जिले से एक बेहद चौंकाने वाला परिणाम सामने आया है, जहाँ भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सुरेश वरपुडकर के परिवार को मतदाताओं ने पूरी तरह से नकार दिया है।, जिले की राजनीति में वर्चस्व रखने वाले वरपुडकर परिवार के लिए यह चुनाव किसी बड़े राजनीतिक झटके से कम नहीं है, क्योंकि उनके परिवार के 5 में से 4 सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा है।
परभणी के मतदाताओं ने इस चुनाव में स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अब स्थापित राजनीतिक परिवारों के बजाय सामान्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सुरेश वरपुडकर के परिवार की हार ने यह साबित कर दिया है कि जनता ने ‘वंशवाद’ के खिलाफ मतदान किया है। इससे पहले इसी तरह का रुझान लातूर नगर पालिका चुनावों में भी देखने को मिला था, जहाँ भाजपा की घराणेशाही को जनता ने खारिज कर दिया था।
वरपुडकर परिवार के चुनावी समीकरण पूरी तरह से बिगड़ गए। उनकी बेटी सोनल देशमुख झरी जिला परिषद समूह से ‘मशाल’ के चुनाव चिह्न पर मैदान में थीं, लेकिन उन्हें भाजपा उम्मीदवार दिलीप देशमुख ने हरा दिया। वहीं, उनके बेटे समशेर वरपुडकर शिंगणापुर जिला परिषद समूह से चुनाव लड़ रहे थे, जिन्हें पांडुरंग खिल्लारे (मशाल चिह्न) ने पटखनी दी। हार का सिलसिला यहीं नहीं रुका; परिवार की बहू प्रेरणा वरपुडकर दैठणा जिला परिषद समूह से चुनावी रण में थीं, जहां उन्हें कांग्रेस की ज्योत्स्ना गणेश घाडगे ने पराजित किया।
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लोहगांव जिला परिषद समूह का मुकाबला काफी दिलचस्प रहा, जहां सुरेश वरपुडकर के दो भतीजे एक-दूसरे के आमने-सामने थे। यहां कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अजित वरपुडकर ने भाजपा के ऐश्वर्य वरपुडकर को हरा दिया। इस तरह, पूरे परिवार में केवल अजीत वरपुडकर ही एकमात्र ऐसे सदस्य रहे जिन्होंने जीत दर्ज की, जबकि बाकी चार को हार नसीब हुई। यह नतीजे न केवल परभणी बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत दे रहे हैं। राज्य के अन्य जिलों जैसे धाराशिव और सोलापुर में भी इसी तरह के कांटे की टक्कर और चौंकाने वाले परिणाम देखने को मिले हैं।






