वसई-विरार में सफाई कर्मचारियों की ग्रेच्युटी अटकी, 21 दिन में भुगतान का अल्टीमेटम
Vasai Virar Sanitation Workers: वसई-विरार में हजारों सफाई कर्मचारियों और उनके परिजनों को वर्षों से ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं मिला है। अदालत पहुंचा मामला अब तूल पकड़ चुका है।
- Written By: अपूर्वा नायक
वसई विरार मनपा (सौ. सोशल मीडिया )
Vasai Virar Sanitation Workers News: वसई-विरार शहर को साफ-सुथरा रखने वाले सफाई कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय को लेकर आखिरकार वसई-विरार महानगरपालिका प्रशासन की नींद टूट गई है।
सड़क की सफाई, घर-घर से कूड़ा इकट्ठा करने और जान जोखिम में डालकर सीवरों को साफ करने वाले हजारों कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद भी उनकी ग्रेच्युटी की राशि नहीं मिल सकी है।
हद तो यह है कि कई कर्मचारियों की मौत के बाद भी उनके बेबस वारिस आज अपने हक के पैसे के लिए वसई-विरार महानगरपालिका और ठेकेदारों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस गंभीर मामले में कर्मचारियों द्वारा अदालत का रुख किए जाने के बाद बैकफुट पर आई महापालिका ने अब सख्त रुख अख्तियार किया है।
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मामले को गंभीरता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। सफाई कर्मचारियों और कामगारों की जो भी ग्रेच्युटी या अन्य बकाया राशि है, उसे अगले 21 दिनों के भीतर पूरी तरह से क्लियर कर दिया जाएगा। किसी भी कर्मचारी या उनके परिजनों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। ठेकेदारों को नियमों का पालन करना ही होगा।
– पृथ्वीराज बी पी आयुक्त, वसई-विरार महापालिका
ग्रेच्युटी नहीं मिली तो होगा जोरदार विरोध प्रदर्शन
यदि सफाईकर्मियों को इस तय समय सीमा के भीतर उनकी ग्रेच्युटी की राशि नहीं मिलती है, तो संगठन की ओर से महापालिका मुख्यालय पर तीव विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। महापालिका के पास ठेकेदारों की जो एफडी जमा है, प्रशासन उसे तुरंत जब्त करे और उसी में से सफाई कामगारों के पैसों का भुगतान करे।
– सुल्तान पटेल, राज्य अध्यक्ष, श्रमजीवी कामगार रयत संगठन
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मनपा प्रशासन ने सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए
- न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अनुसार, इन सफाईकर्मियों को समय पर वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य कानूनी सुविधाएं मिलना अनिवार्य है। सफाई कर्मचारियों के संगठनों के मुताबिक, ठेकेदारों पर कर्मचारियों की ग्रेच्युटी का लगभग 30 से 40 करोड़ रुपये बकाया है।
- आरोप है कि महापालिका प्रशासन ने अब तक सफाई कर्मचारियों को उनके हक की राशि दिलाने के लिए कोई ठोस जमीनी कदम उठाने के बजाय सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए हैं। प्रशासन की ओर से संबंधित ठेकेदारों को केवल औपचारिक पत्र और कारण बताओ नोटिस भेजे जाते रहे।
- हालांकि, महापालिका के पास इन ठेकेदारों की मोटी एफडी राशि सुरक्षित है और इसे जब्त करने की चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन ठेकेदारों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे ठेकेदारों के हौसले बुलंद थे।
