मौत के आगे बेबस मानवता, नालासोपारा में चादर का स्ट्रेचर बनाकर अस्पताल पहुंचे लोग, लेकिन नहीं बची कविता की जान
Nalasopara Rain Tragedy Kavita Jaiswal: नालासोपारा में बाढ़ के पानी के बीच चादर के स्ट्रेचर से अस्पताल पहुंचाई गई कविता जायसवाल की जान नहीं बच सकी। इस घटना की वजह से स्थानीय लोगों में मातम पसर गया है।
- Written By: अनिल सिंह
नालासोपारा में चादर में लपेटकर अस्पताल पहुंचाई गई कविता, नहीं बची जान (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
Kavita Dudhnath Jaiswal Nalasopara Rain: मुंबई से सटे पालघर जिले के वसई-विरार और नालासोपारा क्षेत्र में भले ही आसमान से बरसती आफत की रफ्तार थोड़ी कम हुई हो, लेकिन 7 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के जख्म और खौफनाक यादें आज भी स्थानीय लोगों के जेहन में ताजा हैं। इस जल प्रलय के बीच नालासोपारा से मानवता को झकझोर देने वाली और बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है।
उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र आई 22 वर्षीय एक युवती भारी जलभराव के कारण खुले नाले की चपेट में आ गई। जलमग्न सड़कों की वजह से जब एम्बुलेंस अस्पताल तक नहीं पहुंच सकी, तो स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कमर तक भरे पानी के बीच चादर का अस्थाई स्ट्रेचर बनाया और युवती को अस्पताल ले गए। हालांकि, इस बेहद कठिन संघर्ष के बाद भी मानवता मौत के आगे हार गई।
बकरा कंपाउंड के खुले नाले में गिरी कविता
मृतक युवती की पहचान २२ वर्षीय कविता दुधनाथ जायसवाल के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली थी। घटना के दिन नालासोपारा पूर्व के मणिचा पाड़ा स्थित बकरा कंपाउंड इलाके में चारों तरफ समंदर जैसा मंजर था। सड़कें, नदियां और गंदे नाले सब एक समान स्तर पर बह रहे थे।
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पैदल चल रही कविता पानी के गहरे अनुमान को भांप नहीं सकी और अचानक सड़क किनारे उफनते हुए एक खुले नाले में जा गिरी। जब तक आस-पास के लोग कुछ समझ पाते और उसे बाहर निकालते, तब तक वह काफी मात्रा में दूषित पानी निगल चुकी थी और बेहोश हो गई थी। इलाके में कमर तक पानी भरा होने के कारण किसी भी वाहन या सरकारी आपातकालीन एम्बुलेंस का वहां पहुंच पाना पूरी तरह असंभव हो चुका था।
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स्थानीय जांबाजों ने चादर को बनाया स्ट्रेचर
ऐसी अत्यंत विकट और सांसे रोक देने वाली परिस्थितियों में स्थानीय नागरिकों ने मानवता और साहस का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत एक चादर का इंतजाम किया और उसके चारों कोनों को पकड़कर एक अस्थायी स्ट्रेचर का रूप दिया।
इसके बाद चार-पांच युवकों ने कविता को उस चादर में लपेटा और मूसलाधार बारिश व तेज बहाव वाले गंदे पानी को चीरते हुए पैदल ही नजदीकी अस्पताल की तरफ दौड़ लगा दी। युवकों का यह संघर्ष सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ, जिसने प्रशासन की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। हालांकि, जब वे हांफते हुए अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद कविता को ‘ब्रॉट डेड’ यानी मृत घोषित कर दिया।
अंबाडी रोड जलमग्न, बिजली और मोबाइल नेटवर्क ठप
मौसम विभाग के अनुसार वसई, विरार और नालासोपारा बेल्ट में बारिश की तीव्रता अब बेहद कम हो गई है, लेकिन इसके बावजूद आम जनजीवन पटरी पर नहीं लौट सका है। वसई पश्चिम के मुख्य अंबाडी रोड क्षेत्र की लगभग सभी रिहायशी सोसायटियां और निचले इलाके अभी भी घुटनों से लेकर कमर तक पानी में डूबे हुए हैं।
जलभराव का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा है; अस्पतालों के ग्राउंड फ्लोर में पानी घुसने के चलते गंभीर मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा है। डॉक्टरों के मुताबिक, जलभराव के कारण एम्बुलेंस का मूवमेंट बंद है, जिससे नए मरीज इलाज के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसके साथ ही पिछले 48 घंटों से घरों में बिजली गुल है और मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप होने से वासईकर (स्थानीय निवासी) बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं।
