क्या NDA में जाएंगे शरद पवार? संजय राउत बोले, उनकी विचारधारा पर शक नहीं, लेकिन शिंदे को सम्मान देना गलत

Sanjay Raut Sharad Pawar Eknath Shinde Meeting: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में शरद पवार की बैठक पर संजय राउत ने तीखी आपत्ति जताई है। राउत ने शिंदे के सम्मान पर खेद व्यक्त किया है।
Sanjay Raut On Shinde Pawar Meeting
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शरद पवार की मुलाकात पर भड़के संजय राउत (फोटो क्रेडिट-X)
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Sanjay Raut On Shinde Pawar Meeting: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों शह-मात का खेल चरम पर है। महाविकास आघाड़ी (MVA) के वरिष्ठतम सूत्रधार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार द्वारा बुधवार (8 जुलाई 2026) को विधान भवन परिसर में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से की गई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

इस शिष्टाचार और आधिकारिक बैठक को लेकर शिवसेना (ठाकरे गुट) के फायरब्रांड नेता और सांसद संजय राउत ने शरद पवार पर बेहद तीखा और सीधा हमला बोला है। राउत ने कहा कि शरद पवार जैसे कद्दावर नेता का उन लोगों के दफ्तर में जाकर बैठक करना, जिन्होंने पीठ में छुरा घोंपा, महाविकास आघाड़ी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शरद पवार कभी एनडीए (NDA) में शामिल नहीं होंगे।

गद्दारों को राजनीतिक प्रतिष्ठा देना गलत

दरअसल, शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में भाग लेने विधानमंडल परिसर पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दफ्तर में जाकर उनसे मुलाकात की और राकांपा की एक आंतरिक बैठक भी वहीं कर डाली।

इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए संजय राउत ने कहा, "शरद पवार निश्चित रूप से देश और राज्य के सबसे सम्मानित नेता हैं, लेकिन जिन लोगों ने राज्य में गद्दारी की और अनैतिक तरीके से सरकार गिराई, उनके दफ्तर में जाकर बैठक करने से बड़े नेताओं की विश्वसनीयता कम होती है। क्या मुंबई में बैठक के लिए यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान या राष्ट्रवादी भवन जैसी जगहें कम पड़ गई थीं? अगर शिवसेना ऐसी स्थिति में होती, तो वह कभी भी इन गद्दारों के परिसर में कदम तक नहीं रखती।"

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर भी उठाए सवाल

संजय राउत ने केवल मुलाकात पर ही नहीं, बल्कि सीमा विवाद को लेकर हुई उच्चस्तरीय बैठक की पारदर्शिता और मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। राउत ने आरोप लगाया कि इस अत्यंत संवेदनशील और महाराष्ट्र के स्वाभिमान से जुड़े मुद्दे पर सरकार ने महाविकास आघाड़ी के सभी घटक दलों को विश्वास में नहीं लिया।

उन्होंने पूछा, "सीमा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सालों से मुकदमा लंबित है। इस बैठक में क्या रणनीति तय हुई, सरकार की क्या भूमिका है, इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? शिवसेना जैसी प्रमुख पार्टी, जिसने इस विवाद के लिए सबसे ज्यादा लाठियां खाई हैं और बलिदान दिया है, उसके प्रतिनिधियों को इस बैठक से दूर क्यों रखा गया?"

अजित पवार और शिंदे ने की बेईमानी

संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि अजित पवार के नेतृत्व में जो कुछ भी हुआ, वह कोई राजनीतिक बगावत नहीं बल्कि शुद्ध रूप से गद्दारी थी। उन्होंने कहा, "जब आप खुद उसी गद्दारी के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, तो फिर उन्हीं लोगों को सार्वजनिक रूप से इतना सम्मान क्यों दे रहे हैं? क्या एकनाथ शिंदे का राजनीतिक कद वसंतराव नाईक, विलासराव देशमुख या मनोहर जोशी जैसा है कि उनके कक्ष में जाकर शीश नवाया जाए?"

राउत ने अंत में 'सामना' का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें शरद पवार की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा पर रत्ती भर भी संदेह नहीं है और वे कभी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा नहीं बनेंगे, लेकिन उनके इस कदम ने शिवसेना यूबीटी को असहज जरूर किया है और वे इस विषय पर शरद पवार से आमने-सामने बैठकर खुलकर बात करेंगे।

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