Vikas Diwate Suicide Case: चार्जशीट से अशोक खरात का नाम हटने पर हंगामा, परिजनों ने की दोबारा जांच की मांग
विकास दिवाते (Vikas Diwate) सुसाइड मामले में चार्जशीट से अशोक खरात का नाम हटने पर उठे सवाल। शिरडी के साईं संस्थान कर्मचारी की खुदकुशी मामले में दोबारा जांच की मांग।
- Written By: अनिल सिंह
Ashok Kharat Vikas Diwate Case (फोटो क्रेडिट-X)
Vikas Diwate Case: शिरडी के साईबाबा संस्थान के कर्मचारी विकास दिवाते (Vikas Diwate) आत्महत्या मामले ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। चार साल पुराने इस चर्चित मामले में अब यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि मुख्य संदिग्ध, ढोंगी बाबा अशोक खरात का नाम चार्जशीट से रहस्यमयी ढंग से हटा दिया गया है। विकास दिवाटे के परिजनों ने अब इस मामले की वरिष्ठ स्तर पर दोबारा जांच (Re-investigation) करने की मांग की है, जिससे शिरडी पुलिस और तत्कालीन जांच अधिकारियों पर सवाल उठने लगे हैं।
वर्ष 2022 में साईं संस्थान में कार्यरत युवा कर्मचारी विकास रामदास दिवाटे ने मानसिक प्रताड़ना के चलते फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। विकास के भाई राजेंद्र दिवाटे का आरोप है कि विकास के घरेलू विवाद का फायदा उठाते हुए उनके ससुराल वालों और अशोक खरात ने उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया कि उन्हें मौत को गले लगाना पड़ा। इस SIT Probe into Ashok Kharat के दौरान अब पुराने मामलों की परतें भी उधड़ने लगी हैं।
Vikas Diwate Suicide Case: प्रताड़ना और धमकियों का जाल
राजेंद्र दिवाते द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, अशोक खरात ने विकास को उसकी सरकारी नौकरी से निकलवाने की बार-बार धमकी दी थी। इतना ही नहीं, खरात पर आरोप है कि उसने विकास को जान से मारने की धमकी देकर उस पर भारी मानसिक दबाव बनाया था। परिजनों का कहना है कि इसी निरंतर मानसिक यातना के कारण विकास ने आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि, शुरुआती FIR में नाम होने के बावजूद, चार्जशीट दाखिल करते समय खरात को ‘क्लीन चिट’ मिलना किसी बड़े प्रशासनिक या राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करता है।
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अशोक खरात (सोर्स: सोशल मीडिया)
अशोक खरात के ‘नकदी नेटवर्क’ और शोषण का खुलासा
वर्तमान में अशोक खरात महिलाओं के यौन शोषण और धोखाधड़ी के कई मामलों में पुलिस की गिरफ्त में है। उसके आश्रम से मिली आपत्तिजनक सामग्री और ठगी के सबूतों ने Kharat Criminal Network की पोल खोल दी है। एसआईटी (SIT) अब खरात को अपनी हिरासत में लेकर उन लोगों के नाम उगलवाने की कोशिश कर रही है, जो उसे कानूनी कार्रवाई से बचाने में मदद करते थे। विकास दिवाटे के मामले में भी यह संदेह गहरा रहा है कि सबूतों के अभाव में नहीं, बल्कि किसी के इशारे पर खरात का नाम हटाया गया था।
न्याय के लिए पुनर्विचार की मांग तेज
पीड़ित परिवार ने अब मुख्यमंत्री और राज्य के गृह विभाग से Justice for Vikas Diwate की अपील की है। उनका कहना है कि जब तक इस आत्महत्या मामले की दोबारा गहन जांच नहीं होती, तब तक असली गुनहगार कानून की पकड़ से बाहर रहेगा। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या खरात के पास ऐसे कोई प्रभावशाली संपर्क थे, जिन्होंने चार साल पहले उसे इस गंभीर मामले से बाहर निकलने में मदद की थी। नई जांच से कई सफेदपोशों के बेनकाब होने की संभावना जताई जा रही है।
