अमरावती में गर्मियों में आग की 200 से अधिक घटनाएं: अग्निशमन विभाग की कमी
Amravati Fire Incidents: अमरावती में गर्मियों के दौरान आग लगने की 200 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। शहर में तेजी से बढ़ती मल्टीस्टोरी इमारतों के बावजूद अग्निशमन विभाग के पास चौथी मंजिल तक पहुंचने वाली
Amravati Fire Incidents (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Amravati Fire Brigade: अमरावती शहर का विस्तार तो बहुत तेजी से हो रहा है, लेकिन मनपा का अग्निशमन विभाग आज भी पुरानी सीमाओं में जकड़ा हुआ है। शहर में लगातार मॉल, मल्टीस्टोरी इमारतें, अस्पताल, होटल, व्यावसायिक परिसर और अपार्टमेंट बढ़ रहे हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि फायर ब्रिगेड के पास चौथी मंजिल तक पहुंचने वाली सीढ़ी भी उपलब्ध नहीं है। इस साल गर्मी के मौसम में ही शहर में छोटेबड़े स्तर पर आग लगने की 200 से अधिक घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं, जिसने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
आधुनिक उपकरणों का अभाव
अमरावती की जनसंख्या लगभग 10 लाख के करीब पहुंच चुकी है, लेकिन पूरे शहर की सुरक्षा का जिम्मा केवल 4 अग्निशमन केंद्रों बडनेरा, प्रशांत नगर, ट्रांसपोर्ट नगर और मुख्य मुख्यालय पर है। पिछले तीन साल से प्रस्तावित 3 नए फायर स्टेशन अभी तक बनकर तैयार नहीं हो पाए हैं, जिससे मौजूदा तंत्र पर भारी दबाव है।
विभाग के पास कुल 28 वाहन जरूर हैं, लेकिन आधुनिक संसाधनों की भारी कमी है। ऊंची इमारतों के सामने विभाग इसलिए बेबस है क्योंकि उसके पास केवल 45 फीट ऊंची सीढ़ी उपलब्ध है, जिससे सिर्फ दो या तीन मंजिल तक ही बचाव कार्य संभव है। यदि चौथी या पांचवीं मंजिल पर आग लगती है, तो जवानों को सीढ़ियों से ऊपर जाना पड़ेगा या फिर पूरी तरह से संबंधित इमारत के खुद के फायर सेफ्टी सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ेगा।
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3 करोड़ का वाहन बना सफेद हाथी
मनपा ने करीब 3 करोड़ रुपये खर्च करके एक मल्टी यूटिलिटी रेस्क्यू वाहन खरीदा था। लेकिन चर्चा है कि उचित उपयोग न होने के कारण यह वाहन आज बेकार खड़ा है और केवल सफेद हाथी साबित हो रहा है। शहर में इस साल आग की कुल 330 से अधिक घटनाएं गर्मी में 220 हो चुकी हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
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नियमों के मुताबिक फायरमैन की सख्त जरूरत है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 2 मुख्य फायरमैन के सहारे काम चलाया जा रहा है. चारों केंद्रों पर 118 स्थायी और अनुबंध कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन सुचारू कामकाज के लिए अभी भी 80 और कर्मचारियों की आवश्यकता है।
होती है जांच पड़ताल
अमरावती के अग्निशमन अधीक्षक अजय पंधरे ने कहा कि इमारतों को फायर एनओसी देते समय इस बात की पूरी तरह से जांच-पड़ताल वेरिफिकेशन की जाती है कि उनके पास आग से निपटने के लिए सक्षम और खुद की सुदृढ़ अग्निशमन प्रणाली उपलब्ध है या नहीं।
