लैब्राडोर और जर्मन शेफर्ड हुए पुराने? अब सुरक्षा बलों की पहली पसंद बना 'बेल्जियम मेलिनोइस', जानें क्यों

All India Police Duty Meet Nagpur: नागपुर में देशभर के 'सुपर डॉग्स' का कुंभ! यूपी पुलिस के मर्डर स्पेशलिस्ट 'बॉस' से लेकर एसएसबी के बेल्जियम मेलिनोइस तक, जानें के-9 स्क्वाड के हैरतअंगेज कारनामे।
India's best police dogs gather in Nagpur for AIPDM. Meet 'Boss', the murder specialist from UP, and the elite Belgian Malinois of SSB.
के-9 स्क्वाड (सौजन्य-नवभारत)
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All India Police Duty Meet Nagpur Updates: भारत में पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ काम कर रहे के-9 स्क्वाड जिन्हें श्वान दस्ता भी कहा जाता है, अपराध नियंत्रण से लेकर सीमा सुरक्षा तक में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये विशेष रूप से प्रशिक्षित कुत्ते जिनमें जर्मन शेफर्ड, बेल्जियम मेलिनोइस, लैब्राडोर, डॉबरमैन केवल वफादार साथी ही नहीं बल्कि पुलिस की एक अत्यंत सक्षम ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ इकाई हैं।

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में दैनिक ऑपरेशन और पेट्रोलिंग में इन श्वानों की मदद ली जा रही है। ट्रैकर डॉग किसी भी अपराध स्थल से अपराधियों की गंध का पीछा करते हैं, लूटे गए सामान का पता लगाते हैं और घटनास्थल पर संदिग्धों की पहचान करने में मदद करते हैं।

फिर चाहे क्राइम सीन पर सबूत या मर्डर वेपन खोजना हो, या जंगली इलाकों में लाशें। विभिन्न प्रजातियों के इन श्वानों का कुंभ नागपुर में लगा है। ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट में देशभर के बेस्ट डॉग इस स्पर्धा में हिस्सा लेने आएं हैं। स्पेशल प्रोटेक्शन गार्ड और सशस्त्र सीमा बल के श्वानों ने इस प्रतियोगिता में जबरदस्त प्रदर्शन किया है।

सुपर डॉग साबित हो रहे बेल्जियम मेलिनोइस

एसएसबी की डॉग टीम के हैंडिलर रामविलास जाटव ने बताया कि श्वान दस्तों में डॉग्स का एक-एक दौर रहा है। पहले पुलिस के साथ ज्यादातर लैब्राडोर ही काम करते थे। इसके बाद थोड़े आक्रामक और सूंघने की अधिक क्षमता रखने वाले जर्मन शेफर्ड प्रजाति के श्वान आए। अनेक वर्षों से उनकी मदद ली जा रही थी लेकिन अब फोर्सेस में सबसे ज्यादा डिमांड बेल्जियम मेलिनोइस की है।

ये श्वान बेहद चंचल होते हैं। उनके साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंची रिंकी नामक श्वान पिछली बार प्रतिस्पर्धा में कुछ अंकों से चूक गई थी। इस बार वह जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है और गोल्ड मिलने की उम्मीद है। जाटव ने बताया कि नेपाल और भूटान की सीमा में काम कर रही एसएसबी को इन श्वानों से बहुत ज्यादा मदद मिल रही है।

सीमावर्ती इलाकों में आत्मघाती हमलों का डर बना रहता है। वहीं नशीले पदार्थों की तस्करी भी होती है। चाहे एक्सप्लोसिव हो या नार्कोटिक्स दोनों ही चीजों का पता लगाने के लिए बेल्जियम मेलिनोइस माहिर होते हैं।

आकर्षण का केंद्र मर्डर स्पेशलिस्ट ‘बॉस’

उत्तर प्रदेश पुलिस का लैब्राडोर ‘बॉस’ नामक श्वान इस प्रतियोगिता में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। देशभर से आईं 29 टीमों के 1,300 से अधिक पुलिसकर्मियों और 144 पुलिस डॉग्स के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद बॉस ने अपनी सूंघने और ट्रैकिंग की बेहतरीन क्षमता से सभी को प्रभावित किया है। वर्ष 2019 में पुलिस बल में शामिल हुआ ‘बॉस’ कोई साधारण डॉग नहीं है।

उसे ‘मर्डर स्पेशलिस्ट’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि उसने अब तक 6 से अधिक हत्या के मामलों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। बॉस के हैंडिलर अजय कुमार ने बताया कि धूमनगंज के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में बॉस ने फेंके गए चाकू को सूंघकर एक घर तक पहुंच बनाई, सीधे संदिग्ध के बिस्तर पर चढ़ गया और आरोपी को दबोच लिया। बाद में पता चला कि आरोपी ने अपने ही पिता, मां और बहन की हत्या की थी।

इस शानदार काम के लिए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर ही बॉस को 2,000 रुपये का इनाम दिया। इसके अलावा प्रयागराज में हुए महाकुंभ में भी संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने में उसने अहम भूमिका निभाई। उन्हें उम्मीद है कि इस प्रतियोगिता में भी वह बेहतरीन प्रदर्शन करेगा।

हैंडिलर के साथ समन्वय बेहद जरूरी

रामविलास जाटव ने बताया कि राज्य पुलिस हो या सशस्त्र बल सभी क्षेत्रों में श्वान अब बेहतरीन भूमिका निभा रहे हैं। विशेष तौर पर जंगल क्षेत्रों में काम करने वाली फोर्स को आईईडी ब्लास्ट का डर होता है। ऐसे समय में श्वान आगे चलकर खतरे को भांप लेते हैं। इससे कैजुअल्टी से बचा जा सकता है लेकिन सबसे अहम होता है श्वान का अपने हैंडिलर के साथ समन्वय। दोनों का समन्वय जितना अच्छा होगा काम उतना ही बेहतर होगा। बचपन से हैंडिलर अपने बच्चों की तरह इन श्वानों का पालन-पोषण करते हैं। ज्यादातर श्वानों का सेवा काल 8 से 10 वर्ष होता है। ऐसे में सेवा के बाद उन्हें अपने से दूर करना बेहद कठिन होता है।

  • नवभारत लाइव पर नागपुर से अभिषेक तिवारी की रिपोर्ट
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