नासिक में पानी के लिए महिलाओं का ‘खाली घड़ा मोर्चा’, जिला परिषद सीईओ की गाड़ी रोककर पूछा- क्या आप पिएंगे
Nashik Water Crisis: नासिक के मुलेगांव में भीषण जलसंकट को लेकर महिलाओं ने जिला परिषद पर खाली घड़ा मोर्चा निकाला। सीईओ प्रतिभा संगमनेरे ने तत्काल पानी की टंकियां लगाने के निर्देश दिए।
- Written By: रूपम सिंह
जलसंकट (फोटो सोर्स- नवभारत)
Jal Jeevan Mission Nashik Water Crisis: नासिक त्र्यंबकेश्वर तहसील के मुलेगांव में भीषण जलसंकट की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए गुरुवार को महिलाओं ने नई जिला परिषद (एबीबी सर्कल) पर खाली घड़ा मोर्चा निकाला। यह आंदोलन नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिया वूमेन और आयटक (एआईटीयूसी) मजदूर संगठन के नेतृत्व में किया गया। आंदोलन के दौरान जिला परिषद की प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा संगमनेरे वीसी के लिए जा रही थीं, तभी आंदोलनकारियों ने उनकी गाड़ी रोकने का प्रयास किया। बाद में उनसे चर्चा कर उन्हें निवेदन सौंपा गया। भीषण गर्मी में पानी के लिए किए गए इस आंदोलन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
दूषित पानी से स्वास्थ्य पर पड़ रहा बुरा असर
इस आंदोलन के संबंध में दिए गए निवेदन में कहा गया है कि मुलेगांव की महिलाओं को पिछले चार पीढ़ियों से पानी के लिए एक से डेढ़ किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ रहा है। रोजाना पानी लाने में घंटों समय खर्च होने के कारण कई महिलाओं को कमर और रीढ़ की हड्डी संबंधी बीमारियां हो गई हैं। दूषित पानी के कारण स्वास्थ्य समस्याएं भी गंभीर हो गई हैं। आंदोलनकारियों ने बताया कि पानी भरते समय कुएं में गिरने से चार बच्चों की मौत हो चुकी है।
वालदेवी बांध से दहेगांव मार्ग के जरिए जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन गांव को आज तक एक बूंद पानी नहीं मिला। इसी के विरोध में यह आंदोलन किया गया। आयटक के राजू देसले, कॉमरेड प्राजक्ता कापडणे, एड। नूतन सोनवणे, लता जाधव, सोनाली जाधव और जयश्री भगत के नेतृत्व में आंदोलन किया गया।
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आंदोलन की चेतावनी, रखीं ये मांगें आंदोलनकारियों ने कहा कि स्वतंत्रता के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव की महिलाओं को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस दौरान गांव में शुद्ध पेयजल आपूर्ति, कुओं की सुरक्षा, जलशुद्धिकरण प्रकल्प तथा बालदेवी बांध से पाइपलाइन के जरिए पानी आपूर्ति की मांग की गई। कुंभ मेले के लिए बनाए जा रहे सड़क मार्ग पर टूटी पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत कर गांव में नियमित जलापूर्ति शुरू करने की मांग भी की गई है। शासन ने सात दिनों के भीतर ठोस उपाययोजना नहीं की तो आंदोलन तीव्र करने की चेतावनी महिलाओं ने दी है।
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योजना केवल कागजों तक
जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की घोषणा की गई थी, लेकिन मुलेगांव में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई है। पाइपलाइन टूटने के बाद भी प्रशासन द्वारा उसकी तत्काल मरम्मत की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
सीईओ ने दिए ये आदेश
आंदोलन के दौरान महिलाओं ने कुएं के दूषित पानी की बोतले मुख्य कार्यकारी अधिकारी को दिखाते हुए कहा कि यह पानी आप पीकर दिखाइए’। जिलाधिकारी कार्यालय की ओर जाते समय आंदोलनकारियों ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी की गाड़ी रोककर जवाब मांगा। इसके बाद उन्होंने आधे घंटे में लौटकर बैठक लेने का आश्वासन दिया, तब जाकर आंदोलनकारियों ने गाड़ी को आगे जाने दिया।
इसके बाद मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा संगमनेरकर की अध्यक्षता में त्र्यंबकेश्वर के बीडीओ तथा जल जीवन मिशन के अभियंता की उपस्थिति में प्रतिनिधिमंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुलेगांद की पाइपलाइन का काम पूरा होने तक राजवाड़ा और कोलीवाड़ा क्षेत्र में तत्काल सिंटेक्स पानी की टंकियां लगाने के निर्देश दिए गए।
