Nashik civic controversy (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Civic Controversy: वृक्षों की कटाई के खिलाफ चल रहे जनआंदोलन के कारण चर्चा में रहे तपोवन क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां बबूल के कई पेड़ों पर अज्ञात व्यक्तियों के फोटो और काली पुतलियाँ (गुड़िया) कीलों से ठोंकी हुई पाई गई हैं। इस कृत्य ने न केवल अंधविश्वास का भयावह चेहरा उजागर किया है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुँचाया है।
तपोवन क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कीलमुक्त वृक्ष अभियान के अध्यक्ष अमित कुलकर्णी ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए बताया कि पेड़ों में कील ठोंकने से उनके ऊतकों को नुकसान होता है, जिससे पेड़ अंदर से खोखले होकर सूख सकते हैं।
पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि इस प्रकार के अघोरी कृत्यों के जरिए समाज में भय का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने नगर निगम और पुलिस प्रशासन से दोषियों के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
तपोवन में प्रस्तावित वृक्ष कटाई से पहले नासिक नगर निगम के उद्यान विभाग द्वारा सर्वेक्षण किया गया था। इस पर अमित कुलकर्णी ने सवाल उठाया कि यदि सर्वेक्षण निष्पक्ष और ईमानदारी से हुआ था, तो कीलों से क्षतिग्रस्त ये पेड़ अधिकारियों को क्यों नहीं दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की बातों को नजरअंदाज किया गया है, तो यह नगर निगम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
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अमित कुलकर्णी ने कहा, “पेड़ों में कीलें ठोंकना न केवल प्रकृति के प्रति क्रूरता है, बल्कि यह समाज में फैले अंधविश्वास का भी संकेत है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इसे नजरअंदाज करना और भी चिंताजनक है। हम दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।”