बड़ी खब़रः सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सदन घोटाले में भुजबल को दी बड़ी राहत, ED की याचिका खारिज
Chhagan Bhujbal: महाराष्ट्र सदन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री छगन भुजबल को राहत देते हुए ED की याचिका खारिज की और बॉम्बे हाई कोर्ट के ज़मानत आदेश को बरकरार रखा।
- Written By: आंचल लोखंडे
Chhagan Bhujbal (सोर्सः सोशल मीडिया)
Supreme Court Verdict: महाराष्ट्र सदन घोटाला मामले में पूर्व मंत्री छगन भुजबल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2018 में महाराष्ट्र सदन स्कैम केस में मुंबई की एक अदालत ने भुजबल को ज़मानत दी थी, जिसे एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मंगलवार (21 जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय एस. ओक और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ED की याचिका खारिज कर दी और बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
महाराष्ट्र सदन निर्माण घोटाले के सिलसिले में भुजबल के खिलाफ नई दिल्ली में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि निर्माण कंपनी के साथ किए गए सरकारी अनुबंध में गड़बड़ी हुई और बेहिसाब संपत्ति अर्जित की गई। इस मामले में छगन भुजबल को करीब ढाई साल तक जेल में रहना पड़ा था। बाद में 2018 में उन्हें मुंबई की अदालत से ज़मानत मिली थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश बरकरार
ED द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट के ज़मानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा ज़मानत देते समय दिए गए निर्देश स्पष्ट और कानूनी रूप से सही हैं। संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं पाया गया। इसी आधार पर ED की स्पेशल लीव पिटीशन खारिज कर दी गई।
सम्बंधित ख़बरें
एयर इंडिया AI171 हादसे की जांच अंतिम चरण में, AAIB ने बताया कब आएगी फाइनल रिपोर्ट; सुप्रीम कोर्ट को दिया भरोसा
11 साल पुराने इस केस में पूर्व PM मनमोहन सिंह को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने अब रद्द किया मामला
मकई के छिलकों पर कूदकर प्रैक्टिस कर कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता सिल्वर, जानें कौन है नासिक के सर्वेश कुशारे
शालार्थ ID घोटाले पर नासिक SIT की कार्रवाई: रैकेट का मुख्य आरोपी व रसूखदार संस्थान संचालक संजय गरुड़ गिरफ्तार
क्या था मामला
वर्ष 2005 में, छगन भुजबल पर लोक निर्माण मंत्री रहते हुए पद के दुरुपयोग का आरोप लगा था। आरोपों के अनुसार, उन्होंने अपने परिवार और संबंधित कंपनियों को विभिन्न ठेकों के माध्यम से अनुचित लाभ पहुंचाया। 11 जून 2015 को भुजबल के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दो मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में छगन भुजबल, समीर भुजबल, पंकज भुजबल सहित कुल 52 लोगों के नाम शामिल थे। आरोप था कि महाराष्ट्र सदन के निर्माण का ठेका चमनकर एंटरप्राइजेज को दिलाने में पद का दुरुपयोग किया गया और कंपनी के पक्ष में लाभकारी फैसले लिए गए।
