नासिक सिंहस्थ कुंभमेला 2027 के लिए पुलिस ने तैयार किया सुरक्षा का ‘अभेद किला’; रामकुंड बना हाई सिक्योरिटी जोन
Nashik Kumbh Mela 2027: नासिक सिंहस्थ कुंभमेला 2027 के लिए पुलिस ने सुरक्षा का खाका खींचा। रामकुंड को हाई सिक्योरिटी जोन बनाकर दंगा नियंत्रण पथक और ड्रोन से होगी निगरानी।
- Written By: रूपम सिंह
नासिक सिंहस्थ कुंभमेला (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Nashik Kumbh Mela 2027 Ramkund Security: आगामी सिंहस्थ कुंभमेले 2027 की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नाशिक शहर पुलिस ने एक व्यापक सुरक्षा योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को पुलिस अधिकारियों ने रामकुंड और गोदावरी नदी के तटों पर सघन पेट्रोलिंग कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों का जायजा लिया। श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस विभाग ने सुरक्षा को एक ‘अभेद किले’ में तब्दील करने की तैयारी कर ली है।
पंचवटी, सरकारवाडा और भद्रकाली पुलिस थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। पूरी सुरक्षा व्यवस्था की कमान सहायक पुलिस निरीक्षक हेमंत मोहिते के हाथों में सौंपी गई है, जो अपनी टीम के साथ 24 घंटे निगरानी रखेंगे। पुलिस आयुक्त के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और श्रद्धा के सम्मान में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
सुरक्षा का विस्तृत खाका और निगरानी केंद्र
सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नासिक शहर के संवेदनशील स्थानों को कई जोनों में विभाजित किया गया है। इनमें रामकुंड, अहिल्याबाई होलकर पुल, गोरी पटांगण, टालकुटेश्वर घाट, गांधी तलाव, देवमामलेदार, कपुरथला मैदान और रोकडोबा घाट जैसे प्रमुख स्थानों पर विशेष पुलिस अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। रामकुंड परिसर को ‘हाई सिक्योरिटी जोन’ घोषित करते हुए वहां 14 जवानों का विशेष ‘दंगा नियंत्रण पथक’ चौबीसों घंटे तैनात रहेगा, जो तीन पालियों में अपनी सेवाएं देगा। इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस, वॉर्डन, अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन तंत्र को एक साथ जोड़ा गया है ताकि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई हो सके।
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पुलिस का मुख्य मिशन और कार्ययोजना
पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत निम्नलिखित प्रमुख कार्य किए जाएंगे- घाट क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और लावारिस वस्तुओं की तलाशी के लिए सघन जांच अभियान चलेगा। बड़ी आरती और प्रमुख स्नान के दिनों में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग रूट और बैरिकेडिंग की व्यवस्था होगी। घाट क्षेत्र में दिशासूचक बोर्ड और सार्वजनिक सूचना प्रणाली को हर समय सक्रिय रखा जाएगा, महिला, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग श्रद्धालुओं की मदद के लिए समर्पित ‘हेल्प डेस्क’ बनाए जाएंगे। साथ ही, परिवार से बिछड़े लोगों को परिजनों से मिलाने के लिए ‘खोया-पाया केंद्र’ (खोज केंद्र) कार्य करेंगे।
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तकनीकी निगरानी तंत्र
पुलिस विभाग इस बार तकनीक का भरपूर उपयोग करेगा घाटों पर सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जाएगा। ड्रोन के जरिए भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। कंट्रोल रूम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी। वायरलेस और डिजिटल संचार साधनों का उपयोग बढ़ाकर सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान किया जाएगा।
अंतर-विभागीय समन्वय
कुंभ मेले के दौरान सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक सामूहिक प्रयास होगा- स्वास्थ्य विभागः एम्बुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों की 24 घंटे उपलब्धता।
- मनपाः जल निकासी, साफ-सफाई और घाटों की मरम्मत की निगरानी।
- अग्निशमन विभागः किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए नावों और रेस्क्यू टीम की तैनाती।
- आपदा प्रबंधनः बाढ़ या भीड़ के दबाव जैसी स्थितियों में तत्काल स्थलांतरण की पुख्ता व्यवस्था।
