नासिक के रामकुंड में पानी की किल्लत और गंदगी से बुरा हाल, दूषित पानी में अनुष्ठान करने को मजबूर श्रद्धालु
Nashik Ramkund News: पवित्र रामकुंड में गोदावरी नदी का पानी सूखने और अत्यधिक दूषित होने से श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। नागरिकों ने मनपा से टैंकर द्वारा स्वच्छ जल की मांग की है।
- Written By: रूपम सिंह
नासिक के रामकुंड फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Nashik Ramkund Godavari River Pollution: दक्षिण गंगा के रूप में विख्यात गोदावरी नदी के तट पर स्थित पवित्र रामकुंड परिसर इन दिनों प्रशासनिक बेरुखी का शिकार है। रामकुंड के नदी पात्र में पानी की भारी किल्लत है और जो कुछ पानी बचा है, वह अत्यंत दूषित होकर काई के कारण हरा हो चुका है। इस वजह से यहां धार्मिक अनुष्ठान और अंतिम संस्कार से जुड़े विधि के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अपने दिवंगत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए नासिक समेत राज्य के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं, लेकिन यहां की दयनीय स्थिति के कारण तीर्थक्षेत्र नासिक की वैश्विक छवि को गहरा धक्का लग रहा है। लोगों में भारी नाराजगी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशक्रिया विधि के दौरान मुंडन कराने के बाद पवित्र गोदावरी में स्नान करने की प्राचीन परंपरा है।
लेकिन वर्तमान में नदी पात्र में स्वच्छ पानी की एक बूंद भी शेष नहीं है। पात्र में सड़ा हुआ और दुर्गंधयुक्त काई का पानी जमा है। अंतिम संस्कार की विधि के लिए आए नागरिकों, महिलाओं और बुजुर्गों को बेहद लाचारी में इसी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पानी में खड़े रहकर अनुष्ठान पूरे करने पड़ रहे हैं, वहीं कुछ लोगों को इसी दूषित पानी में स्नान करना पड़ रहा है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
सम्बंधित ख़बरें
नागपुर में कंटेनर से 464 लैपटॉप चोरी का खुलासा, 4 करोड़ का माल बरामद; आरोपी गिरफ्तार
नासिक ट्रैफिक एजुकेशन पार्क फिर होगा शुरू: विवाद के बाद महापौर की पहल पर मनपा देगा पूरा सहयोग
ठाणे के गामदेवी मार्केट में भीषण अग्निकांड: जिंदा जले दमकलकर्मी और गार्ड, कई दुकानें खाक, देखें खौफनाक Video
8 बार अबॉर्शन और पागलखाने भेजने की धमकी, नासिक में महिला के साथ क्यों हुआ ये सब? सुनकर उड़ जाएगा होश
रामकुंड में टैंकर से की जाए स्वच्छ पानी की व्यवस्था
रामकुंड पर स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि विधि के लिए आने वाले लोग अब अपने साथ पीने के पानी की बोतलें लेकर आ रहे हैं। सिर मुढवाने के बाद सिर धोने के लिए इस खरीदे हुए पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। पवित्र तीर्थस्थल पर श्रद्धालुओं को इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जो नासिक मनपा प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
इससे राज्यभर से आने वाले नागरिकों के सामने नासिक शहर की छवि धूमिल हो रही है। लेकिन गर्मियों के कारण जल संकट की स्थिति है, फिर भी रामकुंड जैसे संवेदनशील और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर कम से कम अनुष्ठान के लिए आने वालों की सुविधा हेतु मनपा प्रशासन या पुरोहित संघ द्वारा टैंकर से स्वच्छ पानी की व्यवस्था करना बेहद जरूरी है। मगर, दोनों ही पक्षों की ओर से इस गंभीर समस्या की लगातार अनदेखी की जा रही है।
दूषित पानी से स्नान करने को मजबूर लोग
अंतिम संस्कार के लिए आए एक श्रद्धालु ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि हम अत्यंत दुख की घड़ी में यहां विधि के लिए आते हैं, लेकिन यहां की गंदगी और पानी का अभाव देखकर भारी मानसिक संताप झेलना पड़ता है। अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि नासिक महानगरपालिका केवल कागजों पर स्मार्ट सिटी के दावे न करे, बल्कि रामकुंड पर स्वच्छ पानी की स्थायी व्यवस्था और शुद्धिकरण परियोजना लागू करे।
मृत व्यक्तियों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने आए श्रद्धालुओं को प्रशासन की लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है। काई युक्त और दुर्गंधयुक्त पानी में स्नान करने के कारण त्वचा रोग फैलने की प्रबल आशंका है। मुंडन के बाद सिर धोने के लिए 20 की पानी की बोतल खरीदने की मजबूरी बनी हुई है। मांग की गई है कि मनपा तत्काल टैंकर सेवा शुरू कर कुंडों में स्वच्छ पानी छोड़े।
नासिक रामकुंड पर कम से कम तीन से चार पानी के टैंकरों की तत्काल आवश्यकता है। गर्मी के कारण पहले ही पानी बेहद कम है और जो है वह भी दूषित है। इस गंदे पानी में धार्मिक स्नान करते समय शोक संतप्त परिवारों को मानसिक कष्ट झेलना पड़ रहा है। हिंदुत्ववादी सरकार के कार्यकाल में धार्मिक स्थलों की ऐसी दुर्दशा बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
– सचिन देशमुख, सामाजिक कार्यकर्ता, मालेगांव
