

Nashik NMC General Body Meeting: नासिक ऑनलाइन महासभा आयोजित करने के निर्णय का विरोध होने के बाद नासिक महानगरपालिका की 20 मई को आयोजित महासभा ऑफलाइन ली गई, लेकिन राष्ट्रगान और श्रद्धांजलि के बाद कुछ ही मिनटों में विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता लागू होने का कारण बताते हुए सभा स्थगित कर दी गई। इससे नगरसेवकों, अधिकारियों और कर्मचारियों को सभागृह में बुलाकर सरकारी समय, ईंधन और धन की खुली बर्बादी किए जाने की आलोचना हो रही है। खाड़ी देशों में जारी युद्ध के मद्देनजर राज्य सरकार ने महानगरपालिकाओं और जिला परिषदों को 19 महत्वपूर्ण एहतियाती उपाय तत्काल लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद
महापौर हिमगौरी आडके ने महासभा ऑनलाइन आयोजित करने का निर्णय लिया था। हालांकि, ठाकरे गुट के साथ साथ सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ नगरसेवकों ने इस निर्णय का तीव्र विरोध किया। इसके बाद प्रशासन ने अपना निर्णय बदलते हुए महासभा ऑफलाइन आयोजित करने की घोषणा की।
इसके लिए अधिकांश नगरसेवक और अधिकारी अपने निजी वाहनों से सभागृह पहुंचे। सौ से अधिक वाहनों की आवाजाही से बड़ी मात्रा में ईंधन की बर्बादी हुई। ईंधन बचत का संदेश देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को ही नजरअंदाज किए जाने की चर्चा मनपा के गलियारों में होती रही।
नासिक महासभा शुरू होते ही दिवंगतों को श्रद्धाजलि दी गई और उसके बाद किसी भी विषय पर चर्चा किए बिना विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता लागू होने का हवाला देते हुए सभा तत्काल स्थगित कर दी गई। विशेष बात यह है कि यह आचार संहिता 18 मई से ही लागू हो चुकी थी। ऐसे में यह जानकारी पहले से होने के बावजूद दो दिन बाद ऑफलाइन सभा बुलाने की आवश्यकता क्या थी, यह सवाल नगरसेवकों द्वारा उठाया जा रहा है। ऑनलाइन बैठकों में बार-बार आने वाली तकनीकी समस्याओं के कारण सदस्यों को अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने में कठिनाई हो रही थी। इसलिए महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा के लिए ऑफलाइन महासभा की मांग की गई थी। लेकिन सभा बुलाकर बिना किसी चर्चा के उसे स्थगित कर देने से प्रशासन की योजनाहीनता और अव्यवस्थित कार्यशैली उजागर हो गई।
इस महासभा में नए विद्युत उपकेंद्र के लिए भूमि उपलब्ध कराने, फरवरी माह की कार्रवाई को मंजूरी देने, देवलाली स्थित मनपा की संपत्ति में नागरिक अभिनव वाचनालय संस्था को किराये पर स्थान उपलब्ध कराने, वृक्ष प्राधिकरण समिति के सदस्यों की नियुक्ति तथा शहर के 20 प्रमुख चौकों पर विद्युत सुरक्षा प्रणाली स्थापित करने के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर चर्चा अपेक्षित थी।
विशेष रूप से वृक्ष प्राधिकरण समिति की नियुक्तियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की संभावना थी, लेकिन इन सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने से पहले ही सभा स्थगित कर दिए जाने से यह चर्चा शुरू हो गई है कि विवादास्पद मुद्दों से बचने के लिए ही यह कदम उठाया गया।
नगरसेवक मुकेश शहाणे ने सभागृह में पोस्टर के माध्यम से म्हाडा घोटाले के मामले में मनपा अधिकारियों को प्रशासन द्वारा संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाया। पोस्टर पर लिखा था, म्हाडा जांच शुरू कराने के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस का हार्दिक अभिनंदन। हमारी एक ही मांग है मनपा के भ्रष्ट अधिकारियों को बचाना बंद करें।
एक नगरसेवक ने स्पष्ट किया कि आचार संहिता के कारण नई प्रशासनिक मंजूरियां भले नहीं दी जा सकती थीं, लेकिन नागरिक समस्याओं, विकास कार्यों और अन्य जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने में कोई बाधा नहीं थी। इसके बावजूद बिना चर्चा के सभा स्थगित किए जाने से प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।