‘नासिक में सड़कों के गड्ढे और कुंभ की धीमी तैयारी’, दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे मनसे प्रमुख राज ठाकरे
Raj Thackeray Nashik Visit: मनसे प्रमुख राज ठाकरे के दो दिवसीय नासिक दौरे से गरमाई राजनीति। कुंभ मेले के काम, गड्ढों और संगठन पर होगी समीक्षा। कार्यकर्ताओं से करेंगे मुलाकात।
- Written By: अनिल सिंह
दो दिवसीय नासिक दौरे पर राज ठाकरे (सोर्स-सोशल मीडिया)
Raj Thackeray Nashik VisitSimhastha Kumbh Mela: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे 6 और 7 अगस्त के अपने तय कार्यक्रम के तहत दो दिवसीय दौरे पर नासिक पहुंचे हैं। मुंबई नाका क्षेत्र में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा उनका जोरदार स्वागत किया गया।
हालिया नगर निगम (निकाय) चुनावों के बाद राज ठाकरे का यह पहला नासिक दौरा है, जिसे आगामी रणनीतियों और 2027 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुंभ मेले की आड़ में सड़कों की बदहाली पर समीक्षा
नासिक शहर में 2027 के कुंभ मेले के नाम पर जगह-जगह की जा रही खुदाई और सड़कों पर बने खतरनाक गड्ढों के कारण आम नागरिकों में भारी आक्रोश है। जर्जर सड़कों और हादसों की वजह से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि कई नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
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अपने इस दौरे के दौरान राज ठाकरे शहर और ग्रामीण इलाकों के मनसे पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें करेंगे। शहर की दुर्दशा और धीमी गति से चल रहे विकास कार्यों को लेकर राज ठाकरे का क्या रुख रहता है, इस पर पूरी राजनीति की नजर टिकी हुई है।
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2015 के कुंभ मॉडल और तपोवन में पेड़ कटाई का मुद्दा
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 के नासिक कुंभ मेले के दौरान नासिक नगर निगम में मनसे की सत्ता थी। मनसे का दावा है कि उस समय विशाल स्तर पर काम होने के बावजूद शहर की हालत इतनी बदतर कभी नहीं हुई थी।
इसके अलावा, इस बार प्रशासन द्वारा साधुग्राम निर्माण के नाम पर तपोवन क्षेत्र में लगभग 2,000 पेड़ काटने का प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसका मनसे ने कड़ा विरोध किया है। पार्टी का तर्क है कि जब 2015 में बिना पेड़ काटे कुंभ का सफल आयोजन हो सकता था, तो इस बार पेड़ों की बलि क्यों दी जा रही है?
बीजेपी-शिंदे गुट (महायुति) पर हमला बोलने की तैयारी
नगर निगम चुनावों में मनसे का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका था, जिससे पार्टी संगठन को बड़ा झटका लगा था। अब कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और निकाय चुनाव की हार से उबारने के लिए राज ठाकरे खुद मैदान में उतरे हैं।
अटकलें लगाई जा रही हैं कि नासिक में कुंभ की बदहाली, भ्रष्टाचार और तपोवन पर्यावरण विवाद को लेकर राज ठाकरे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) को अपने तीखे बयानों से कटघरे में खड़ा कर सकते हैं।
