FSI नियम का बड़ा असर, TDR महंगा, मकान भी महंगे! नासिक में नए निर्माण की रफ्तार पड़ी धीमी
Nashik TDR Rates: नासिक में प्रीमियम एफएसआई व TDR के 50-50 नियम के बाद टीडीआर की दरें 38% से बढ़कर 60% पहुंच गई हैं। इससे निर्माण लागत, घरों की कीमतें बढ़ रही हैं व नई निर्माण अनुमतियां घटने लगी हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नासिक टीडीआर,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Nashik TDR Market Impact: नासिक मनपा द्वारा नई इमारतों के निर्माण में प्रीमियम एफएसआई और टीडीआर का 50-50 प्रतिशत उपयोग अनिवार्य किए जाने के कारण टीडीआर बाजार पर मुट्ठी भर बिल्डरों का वर्चस्व कायम हो गया है।
पिछले छह महीनों में टीडीआर की दरें 38 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत और अब सीधे 60 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं। इसके कारण अन्य डेवलपर्स की मुसीबतें बढ़ गई हैं, घरों की कीमतें महंगी हो रही हैं और मनपा में नई निर्माण अनुमतियों का प्रमाण भी घटने लगा है।
अनिवार्य नियम से रियल स्टेट बाजार बेपटरी
टीडीआर का बड़ा कारोबार करने वाले कुछ गिने-चुने व्यवसायी किसानों या जमीन मालिकों से महज 15 प्रतिशत की दर से टीडीआर खरीदते हैं, लेकिन बाजार में उसे बहुत ऊंचे दामों पर बेचते हैं। इससे मूल जमीन मालिकों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हो रही है।
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टीडीआर कारोबारियों द्वारा इसे 75 प्रतिशत तक ले जाने की तैयारी की जा रही है, जिससे नासिक में घर और अधिक महंगे होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। टीडीआर की दरें अत्यधिक बढ़ने के कारण आम बिल्डरों के लिए घर बनाकर बेचना मुश्किल हो रहा है।
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क्रेडाई की मांग और टीडीआर नीति का इतिहास
इसके चलते नगर विकास विभाग के पास नई निर्माण अनुमतियों के आवेदन कम आ रहे हैं, जिससे मनपा को विकास शुल्क के रूप में मिलने वाला बड़ा राजस्व भी घटने लगा है, बिल्डरों व डेवलपर्स की संस्था क्रेडाई ने टीडीआर के 50 प्रतिशत उपयोग की अनिवार्यता को तुरंत वापस लेने की मांग की है। इस संदर्भ में मनपा आयुक्त को दो बार ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
