फ्लेमिंगो आवास को लेकर विवाद तेज, नवी मुंबई-ठाणे की झीलों को वेटलैंड मानने पर वन विभाग की आपत्ति
Navi Mumbai Wetland Row: ठाणे की कई झीलों को वेटलैंड मानने से इनकार करने वाली रिपोर्ट पर मैंग्रोव वन विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई है। विभाग ने इन क्षेत्रों को प्रवासी पक्षियों के लिए संवेदनशील बताया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
नवी मुंबई वेटलैंड फ्लेमिंगो हैबिटैट (सौ. सोशल मीडिया )
Navi Mumbai Wetland Row Mangrove Department: राज्य के मैंग्रोव वन विभाग ने अब ठाणे जिला स्तर पर वेटलैंड मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट पर गंभीर आपत्ति जताई है, जिसमें नवी मुंबई और ठाणे इलाकों में अलग-अलग पानी की जगहों को वेटलैंड मानने से मना करने की सिफारिश की गई थी।
मैंग्रोव वन विभाग ने अपने आधिकारिक पत्र में साफ कहा है कि सभी संबंधित जगहें बायोडायवर्सिटी के मामले में बहुत सेंसिटिव हैं और फ्लेमिंगो और दूसरे माइग्रेटरी पक्षियों के लिए जरूरी रहने की जगह हैं, इसलिए उन्हें वेटलैंड (कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट) रूल्स 2017 के तहत नोटिफाई करने की जरूरत है।
वेटलैंड को बताया गया धान और नमक के खेत
ठाणे डिस्ट्रिक्ट लेवल वेटलैंड मॉनिटरिंग कमेटी ने कुछ दिन पहले जो रिपोर्ट दी थी, उसमें फ्लेमिंगो पॉइंट, टी। एस। चाणक्य लेक, लोटस लेक, ज्वेल ऑफ नवी मुंबई, गणेश मंदिर लेक, गोठीवली माइन, जीजामाता बोट क्रीक और निलजे लेक को वेटलैंड की कैटेगरी में न आने की सिफारिश की गई थी।
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इस समिति ने सैटेलाइट मैप, रिकॉर्ड, डेवलपमेंट प्लान और संबंधित जगहों के पिछले लैंड यूज के आधार पर अपने नतीजे दर्ज किए थे। समिति ने कहा था कि कुछ जगहें नेचुरल वेटलैंड नहीं थीं, क्योंकि वे पहले नमक के खेत, धान के खेत या ड्रेनेज प्रोजेक्ट थे।
मैंग्रोव विभागीय नॉर्थ कोंकण के डिवीजनल वन अधिकारी डी। पी। खाड़े और ठाणे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के डिप्टी संरक्षक ऑफ फॉरेस्ट सचिन रेपाल ने इस पर आपत्ति जताई और ठाणे जिलाधिकारी और डिस्ट्रिक्ट वेटलैंड मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ। श्रीकृष्ण पांचाल को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए लिखा। इन पत्रों में बताया गया है कि ठाणे क्रीक एरिया में कई झीलें, वॉटर बॉडी और क्रीक एरिया माइग्रेटरी व ‘के लिए बहुत जरूरी हैं।
राज्य वन विभाग नवी मुंबई, ठाणे और डोंबिवली में वेटलैंड रिपोर्ट को चैलेंज करेगा। वेटलैंड मॉनिटरिंग कमेटी में मैग्रोव डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों की राय पर विचार किया जाना था।
नवी मुंबई मनपा ने डेवलपमेंट प्लान में इन जगहों के लिए वेटलैंड रिजर्व किए हैं, ऐसे में ठाणे वेटलैंड मॉनिटरिंग कमेटी ऐसी रिपोर्ट कैसे दे सकती है? यह पूछा जाएगा कि जब मैग्रोव बफर एरिया को बचाने की जिम्मेदारी इसी डिपार्टमेंट की है, तो उनकी राय पर विचार किए बिना ऐसी रिपोर्ट कैसे तैयार की जा सकती है।
– गणेश नाईक, वन मंत्री
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दिए गए पत्र में कई जगहों का किया गया उल्लेख
- 65.21 वर्ग किमी ठाणे खाड़ी इलाके को रामसर का दर्जा मिला, हर साल लाखों प्रवासी पक्षी आते हैं।
- टी एस चाणक्य झील, एन आर आई झील इलाका, डी पी एस झीलें और नवी मुंबई की ज्वेल झीले फ्लेमिंगों के रेगुलर रहने की जगह है।
- नवी मुंबई की अलग-अलग झीलों और वेटलै को ठाणे खाड़ी इलाके के पूरे इकोसिस्टम का हिस्सा मानना जरूरी है।
- इन पानी के सोर्स का बचाव न सिर्फ लोकल बल्कि इंटरनेशनल एनवायरनमेंटल जिम्मेदारी भी है।
- इन जगहों को नेशनल वेटलै एक्ट के तहत ‘झीलें’ और ‘टाइडल मडफ्लैट्स’ की कैटेगरी में रजिस्टर किया जाना चाहिए,
- सिर्फ पहले के जमीन के इस्तेमाल या इंसानों की बनाई प्रकृति के आधार पर वेटलैंड का दर्जा देने से मना करना गलत है।
