दूसरों को मराठी सिखाने वाली सरकार को लगा बड़ा झटका; खुद मराठी भाषी छात्र ही अपनी भाषा में हो रहे फेल

Marathi Students Fail in Marathi SSC 2026: महाराष्ट्र में दसवीं की परीक्षा में 94 हजार से ज्यादा छात्र मराठी में फेल। सरकार के भाषाई संरक्षण के दावों को लगा बड़ा झटका।
Students Fail Marathi SSC
मराठी पर सरकार को झटका, SSC परीक्षा में 94 हजार से अधिक छात्र मराठी में फेल (फोटो क्रेडिट-X)
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Students Fail Marathi SSC: महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रही राजनीति के बीच दसवीं के परीक्षा परिणामों ने एक कड़वी सच्चाई पेश की है। सरकार एक ओर गैर-मराठी रिक्शा चालकों के लाइसेंस रद्द करने की धमकी देकर उन्हें मराठी सीखने पर विवश कर रही है, तो दूसरी ओर राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था अपने ही बच्चों को मातृभाषा में पास कराने में विफल साबित हो रही है। इस वर्ष के परिणाम दर्शाते हैं कि मराठी को बचाने का संघर्ष अब केवल बाहरी लोगों से नहीं, बल्कि घर के भीतर बढ़ती भाषाई उदासीनता से भी है।

आंकड़ों के अनुसार, 10,87,699 छात्रों ने मराठी को अपनी पहली भाषा के रूप में चुना था, जिनमें से लगभग 92.57% ही सफल हुए। इसका सीधा अर्थ है कि हजारों बच्चे उस भाषा में भी परीक्षा पास नहीं कर सके, जिसमें वे सोचते, सपने देखते और घर में बात करते हैं। यह भाषाई संकट आने वाले समय में मराठी के 'विलुप्त होने' के खतरे की ओर इशारा करता है।

शिक्षण पद्धति और शिक्षकों पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में मराठी पढ़ाने की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है। आज ऐसे शिक्षकों की कमी है जो पाठ्यपुस्तकों के बाहर जाकर छात्रों में भाषा के प्रति प्रेम जगा सकें। व्याकरण के नियमों (जैसे कर्ता-कर्म-क्रिया) के प्रति शिक्षकों की अनभिज्ञता छात्रों में भी स्थानांतरित हो रही है। इसके साथ ही, पाठ्यपुस्तकों की सामग्री का स्तर भी गिरा है, जो अब छात्रों को भाषाई रूप से समृद्ध करने के बजाय केवल एक औपचारिक कार्य बनकर रह गया है।

Students Fail Marathi SSC Statistics

डिजिटल संवाद और आधुनिक जीवनशैली का प्रभाव

आज की पीढ़ी बर्गर, पिज्जा और नूडल्स की संस्कृति के साथ-साथ डिजिटल संवाद की ओर बढ़ चुकी है। मोबाइल पर टाइप की जाने वाली 'मिश्रित अंग्रेजी' और सोशल मीडिया की संक्षिप्त भाषा ने मानक मराठी के व्याकरण को गौण कर दिया है। शहरी परिवेश में पले-बढ़े माता-पिता का अपने बच्चों से घर पर मराठी के बजाय अन्य भाषाओं में बात करना भी इस गिरावट का एक बड़ा कारण है।

  • इस वर्ष कुल 94,544 छात्र मराठी विषय में न्यूनतम उत्तीर्ण अंक भी हासिल नहीं कर पाए।
  • मराठी को अपनी पहली भाषा के रूप में चुनने वाले करीब 8% छात्र परीक्षा में असफल रहे।
  • रिपोर्ट के अनुसार, कई शिक्षक स्वयं व्याकरण के बुनियादी नियमों और भाषाई साहित्य की गहराई से अनभिज्ञ हैं।
  • मोबाइल फोन की 'मिश्रित भाषा' के प्रभाव के बीच मानक मराठी भाषा का स्थान कम होता जा रहा है।

दिशाहीन सरकारी प्रयास

मराठी भाषा के संरक्षण के लिए किए जा रहे सरकारी प्रयास वर्तमान में दिशाहीन नजर आ रहे हैं। भाषा को रोजगार और ज्ञान सृजन से जोड़ने में सरकार बहुत पीछे रह गई है। केवल आदेश जारी करने और दूसरों को भाषा सीखने के लिए विवश करने से मराठी समृद्ध नहीं होगी। यदि सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता और नई पीढ़ी के जुड़ाव पर काम नहीं किया, तो यह परिणाम केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि मराठी भाषा के पतन की शुरुआत साबित हो सकते हैं।

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