पिंपरी-चिंचवड़ मनपा की डिजिटल व्यवस्था फेल, करोड़ों खर्च के बाद भी कागजी फाइलों पर निर्भर प्रशासन
PCMC E Office Project: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा का 121 करोड़ रुपये का ई-ऑफिस प्रोजेक्ट तकनीकी खामियों और सर्वर समस्याओं के कारण विफल साबित हो रहा है। कार्यालयों में अब भी कागजी फाइलों का ढेर लगा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका (सोर्स- सोशल मीडिया)
PCMC E Office Project Failure Corruption News: पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका को आधुनिक और तकनीक-संपन्न बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘ई-ऑफिस’ प्रणाली वर्तमान में सफेद हाथी साबित हो रही है।
प्रशासनिक कामकाज को पेपरलेस बनाने के लिए नगर निकाय ने डॉक्युमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (डीएमएस) पर लगभग 121 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया, लेकिन धरातल पर इसके परिणाम शून्य नजर आ रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से इस प्रणाली को लागू करने की कोशिशें की जा रही हैं, किंतु बार-बार आने वाली तकनीकी खराबी और सर्वर ठप होने की समस्याओं ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को पंगु बना दिया है।
कार्यालयों में फाइलों के अंबार
कार्यालयों में फाइलों के अंबार इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत 1 अप्रैल 2025 को पिंपरी-चिंचवड़ स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा ओरेकल सॉफ्ट इंस्पेक प्रोजेक्ट के तहत की गई थी। अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच फाइलों के पारदर्शी डिजिटल आदान-प्रदान के लिए करीब 1,707 डिजिटल हस्ताक्षर कोड (डीएससी) भी तैयार किए गए थे।
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हालांकि, करोड़ों के इस तामझाम के बावजूद आज भी मनपा कार्यालयों में फाइलों के अंबार लगे हुए हैं। महत्वपूर्ण प्रस्तावों और सूचनाओं के लिए अभी भी पारंपरिक कागजी नोटशीट का ही सहारा लिया जा रहा है। डिजिटल व्यवस्था के सुस्त होने के कारण पुराने दस्तावेजों को खोजने और नई फाइलों को प्रोसेस करने में दोगुना समय लग रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।
33 लाख रुपये का अतिरिक्त ठेका
प्रणाली की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि 121 करोड़ खर्च करने के बाद भी इसके रखरखाव के लिए ‘टेक नाइन सर्विसेस’ नामक कंपनी को 33 लाख 27 हजार रुपये का अतिरिक्त ठेका दिया गया है, जिसे हाल ही में स्थायी समिति ने मंजूरी दी। इस अतिरिक्त खर्च ने जनता के पैसे के दुरुपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, स्मार्ट सिटी कंपनी और महानगर पालिका के बीच समन्वय की कमी के कारण अधिकारी इस असफलता की जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं।
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भ्रष्टाचार के आरोप
इस मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मारुती भापकर ने गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है। उनका दावा है कि एक विशिष्ट ठेकेदार को लाभपहुंचाने के लिए लागत को जानबूझकर बढ़ाया गया। भापकर ने इस पूरे प्रोजेक्ट की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि इस फिजूलखर्ची की वसूली संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों से की जानी चाहिए। डिजिटल इंडिया के दौर में पिंपरी-चिंचवड़ का यह ‘ई-ऑफिस’ मॉडल फिलहाल विकास के बजाय अव्यवस्था और धन की बर्बादी का प्रतीक बनकर रह गया है।
